‘हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं... चिंता मत करो’, प्रेमानंद महाराज का भावुक संदेश; स्वास्थ्य को लेकर भक्तों की बढ़ी चिंता
वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने भावुक वीडियो जारी कर भक्तों से चिंता न करने की अपील की। पिछले 9 दिनों से उनकी पदयात्रा बंद है और स्वास्थ्य को लेकर भक्तों में चिंता बढ़ गई है।
वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों और शिष्यों के लिए एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया है। करीब 1 मिनट 19 सेकेंड का यह वीडियो रविवार को केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया, जिसके बाद लाखों भक्त भावुक हो उठे।
वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने बेहद शांत और भावुक अंदाज में कहा “बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। बिना बोले भी तुम्हारे दिमाग में हम रहेंगे।” उनके इस संदेश के बाद भक्तों के बीच उनकी तबीयत को लेकर चिंता और बढ़ गई है। दरअसल, 17 मई से प्रेमानंद महाराज की रात्रि पदयात्रा बंद है और वह भक्तों से एकांतिक मुलाकात भी नहीं कर रहे हैं।
स्वास्थ्य ठीक नहीं, डायलिसिस पर हैं महाराज
जानकारी के अनुसार प्रेमानंद महाराज की दोनों किडनियां खराब हैं और उन्हें सप्ताह में 2 से 3 बार डायलिसिस कराना पड़ता है। स्वास्थ्य खराब होने के कारण पिछले 9 दिनों से उनकी प्रसिद्ध पदयात्रा स्थगित है।
17 मई की रात हजारों भक्त रोज की तरह उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन महाराजजी पदयात्रा पर नहीं निकले। बाद में उनके शिष्यों ने लाउडस्पीकर से घोषणा कर बताया कि स्वास्थ्य कारणों से पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की जा रही है।
हालांकि, कुछ दिन पहले प्रेमानंद महाराज केली कुंज आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित गुरु संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन करने पहुंचे थे।
भक्तों को दिया आध्यात्मिक संदेश
वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने भक्तों से भजन, नामजप और सेवा में जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा—
“जो जहां जिस सेवा में है, वहीं रहिए। खूब नाम जप करो। निर्भय, निश्चिंत और निशोक होकर भजन करो।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनका एकांतवास उनके भक्तों के लिए है, अपने लिए नहीं।
डेढ़ किलोमीटर की पदयात्रा में उमड़ती थी भीड़
स्वास्थ्य खराब होने से पहले प्रेमानंद महाराज रोज तड़के 3 बजे केली कुंज आश्रम से सौभरी वन तक करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल पदयात्रा करते थे। उनके दर्शन के लिए रोज हजारों श्रद्धालु पहुंचते थे। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार और बड़े पर्वों पर लाखों भक्त उनकी एक झलक पाने आते थे।
13 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर
प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की नरवल तहसील के अखरी गांव में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्म की ओर था।
महज 13 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और काशी पहुंच गए। वहां उन्होंने ब्रह्मचर्य जीवन अपनाया और गुरु गौरी शरण जी महाराज से दीक्षा ली। बाद में वृंदावन आकर राधावल्लभ संप्रदाय से जुड़ गए और धीरे-धीरे देशभर में प्रसिद्ध संत के रूप में पहचान बनाई।