UPSC Prelims 2026: देशभर में परीक्षा सम्पन्न, पेपर-1 रहा लंबा और कठिन, 8.19 लाख अभ्यर्थियों ने लिया हिस्सा
UPSC Prelims 2026 परीक्षा देशभर में सम्पन्न हुई। पेपर-1 को विशेषज्ञों ने लंबा और कठिन बताया, जिसमें विश्लेषणात्मक प्रश्नों की भरमार रही। लगभग 8.19 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (CSE Prelims 2026) का आयोजन 24 मई 2026 को देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सफलतापूर्वक किया। इस परीक्षा में करीब 8,19,372 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जबकि कुल लगभग 933 पदों के लिए यह परीक्षा आयोजित की गई।
इस वर्ष परीक्षा का आयोजन दो शिफ्टों में ऑफलाइन OMR आधारित मोड में किया गया। सुबह की शिफ्ट में जनरल स्टडीज पेपर-1 और दोपहर में सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (CSAT) पेपर-2 आयोजित हुआ।
पेपर-1 का विश्लेषण
अभ्यर्थियों और विशेषज्ञों के अनुसार इस बार पेपर-1 पिछले वर्ष की तुलना में अधिक लंबा और कठिन रहा। प्रश्नों का फोकस रटने के बजाय विश्लेषणात्मक क्षमता और कॉन्सेप्ट क्लैरिटी पर ज्यादा रहा।
विषयवार प्रश्नों का विभाजन इस प्रकार रहा:
- अर्थव्यवस्था (Economy): 19 प्रश्न
- पर्यावरण (Environment): 11 प्रश्न
- भूगोल (Geography): 13 प्रश्न
- इतिहास एवं कला-संस्कृति: 20 प्रश्न
- राजनीति एवं शासन: 8 प्रश्न
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: 18 प्रश्न
- विविध (Miscellaneous): 11 प्रश्न
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार अर्थव्यवस्था के प्रश्न करंट अफेयर्स और नीतियों से सीधे जुड़े थे, जबकि इतिहास और कला-संस्कृति में गहन तथ्यात्मक और अवधारणात्मक ज्ञान की आवश्यकता रही। वहीं राजनीति के प्रश्न अपेक्षाकृत कम लेकिन अधिक विश्लेषणात्मक थे।
नए बदलाव और प्रमुख विशेषताएं
- इस बार यूपीएससी ने तीन नए परीक्षा केंद्र कानपुर, मेरठ और भुवनेश्वर में जोड़े
- परीक्षा केंद्रों की संख्या 80 से बढ़ाकर 83 कर दी गई
- लगभग 23,000 अभ्यर्थियों ने नए केंद्रों का चयन किया
- पहली बार परीक्षा के बाद जल्द आंसर-की जारी करने की व्यवस्था लागू की गई
CSAT पेपर की स्थिति
CSAT पेपर में इस बार कुछ नए और अप्रत्याशित प्रकार के प्रश्न देखने को मिले। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार पेपर संतुलित रहा और समय प्रबंधन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए हल करना संभव था।
कुल मिलाकर विश्लेषण
कुल मिलाकर UPSC Prelims 2026 का पेपर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक लंबा, अप्रत्याशित और विश्लेषणात्मक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षा उम्मीदवारों की वास्तविक समझ, निर्णय क्षमता और निरंतर अध्ययन को परखने पर केंद्रित रही।