युवाओं को पाकिस्तानी कहने पर घिरे रिजिजू, कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर ने दिया करारा जवाब
सोशल मीडिया पर तेजी से उभरे “कॉकरोच जनता पार्टी” डिजिटल आंदोलन को लेकर अब राजनीतिक विवाद गहरा गया है।
भारत में सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों की नई जमीन बन चुका है। इसी कड़ी में “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम का एक डिजिटल अभियान अचानक देशभर में चर्चा का विषय बन गया। शुरुआत में इसे एक व्यंग्यात्मक ट्रेंड माना गया, लेकिन धीरे-धीरे यह युवाओं की आवाज और सरकार विरोधी ऑनलाइन आंदोलन के रूप में सामने आने लगा। अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।
कैसे शुरू हुआ “कॉकरोच जनता पार्टी” आंदोलन?
इस पूरे विवाद की शुरुआत एक अदालती टिप्पणी के बाद हुई, जिसमें कथित तौर पर “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल चर्चा में आया। हालांकि बाद में यह स्पष्ट किया गया कि टिप्पणी कुछ फर्जी डिग्री धारकों और गलत तरीके से वकालत करने वालों के संदर्भ में थी, लेकिन सोशल मीडिया पर यह शब्द तेजी से वायरल हो गए।
इसी वायरल ट्रेंड को डिजिटल एक्टिविस्ट Abhijit Dipke ने एक नए ऑनलाइन अभियान का रूप दिया। उन्होंने “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शुरू किया, जो शुरुआत में व्यंग्य और मीम्स के जरिए सिस्टम पर सवाल उठाता था। लेकिन कुछ ही समय में यह प्लेटफॉर्म युवाओं के मुद्दों को उठाने वाला बड़ा डिजिटल मंच बन गया।
युवाओं के मुद्दों ने दिलाई लोकप्रियता
कॉकरोच जनता पार्टी ने बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक, सरकारी नौकरियों में देरी और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को लगातार सोशल मीडिया पर उठाया। इसकी पोस्ट और वीडियो खासकर युवाओं के बीच तेजी से वायरल होने लगे।
कई यूजर्स का मानना था कि यह प्लेटफॉर्म उन मुद्दों को सामने ला रहा है जिन्हें मुख्यधारा की राजनीति अक्सर नजरअंदाज कर देती है। धीरे-धीरे इसके फॉलोअर्स लाखों में पहुंच गए और यह कई बड़े राजनीतिक सोशल मीडिया पेजों को भी पीछे छोड़ने लगा।
NEET विवाद के बाद आंदोलन को मिला बड़ा समर्थन
जब NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद सामने आया, तब कॉकरोच जनता पार्टी ने मेडिकल अभ्यर्थियों की नाराजगी और छात्रों के विरोध को सोशल मीडिया पर जोरदार तरीके से उठाया। इसी दौरान इस आंदोलन की पहुंच और प्रभाव तेजी से बढ़ा।
सोशल मीडिया पर हजारों छात्रों ने इस प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी आवाज उठाई। कई लोगों ने इसे “डिजिटल यूथ मूवमेंट” तक कहना शुरू कर दिया।
रिजिजू के बयान से बढ़ा विवाद
हाल ही में केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने बिना किसी का नाम लिए बयान दिया कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विदेशी ताकतों जैसे पाकिस्तान और जॉर्ज सोरोस के प्रभाव से फॉलोअर्स जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं की बड़ी आबादी मौजूद है और यहां वास्तविक फॉलोअर्स की कमी नहीं है।
हालांकि रिजिजू ने सीधे तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे उसी आंदोलन से जोड़कर देखा गया। इसके बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
अभिजीत दिपके का पलटवार
रिजिजू के बयान के बाद Abhijit Dipke ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग साझा करते हुए दावा किया कि उनके प्लेटफॉर्म के 94 प्रतिशत से अधिक दर्शक भारत से हैं।
दिपके ने सवाल उठाया कि आखिर बिना किसी ठोस प्रमाण के भारतीय युवाओं को विदेशी प्रभाव से क्यों जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह युवाओं और छात्रों के मुद्दों से जुड़ा है।
अकाउंट हैक और वेबसाइट ब्लॉक होने के आरोप
अभिजीत दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स और वेबसाइट को या तो हैक कर लिया गया है या भारत में ब्लॉक किया गया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें धमकियां भी मिली हैं।
दिपके के अनुसार, उन्होंने एक ऑनलाइन याचिका शुरू की थी, जिस पर लाखों लोगों ने समर्थन दिया था। लेकिन बाद में वेबसाइट अचानक बंद हो गई। फिलहाल वह “Cockroach is Back” नाम के बैकअप अकाउंट के जरिए अपने अभियान को जारी रखने का दावा कर रहे हैं।
कौन हैं अभिजीत दिपके?
Abhijit Dipke वर्तमान में अमेरिका के बोस्टन में रहते हैं। वह पहले भी सोशल मीडिया और राजनीतिक डिजिटल कैंपेन से जुड़े रहे हैं। बताया जाता है कि 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने डिजिटल रणनीतियों पर काम किया था।
अब वह खुद को युवाओं और छात्रों की आवाज उठाने वाला डिजिटल एक्टिविस्ट बताते हैं।
डिजिटल राजनीति का नया चेहरा?
कॉकरोच जनता पार्टी का मामला यह दिखाता है कि आज सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का प्लेटफॉर्म नहीं रहा। डिजिटल कैंपेन अब सीधे राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर रहे हैं। खासकर युवा वर्ग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी नाराजगी और मांगों को संगठित तरीके से सामने ला रहा है।
हालांकि इस तरह के आंदोलनों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या ये पूरी तरह स्वतंत्र हैं या इनके पीछे किसी प्रकार की राजनीतिक रणनीति काम कर रही है। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन चुका है।