रिजिजू के बयान से तेज हुई डिजिटल राजनीति की बहस, कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर बढ़ा विवाद..

केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju के विदेशी प्रभाव वाले फॉलोअर्स संबंधी बयान के बाद “कॉकरोच जनता पार्टी” डिजिटल अभियान विवादों में आ गया। अभियान से जुड़े Abhijeet Dipke ने दावा किया कि उनके अधिकांश फॉलोअर्स भारतीय हैं और युवाओं को विदेशी प्रभाव से जोड़ना गलत है। यह डिजिटल मंच बेरोजगारी, परीक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में रहा है।

May 24, 2026 - 15:51
रिजिजू के बयान से तेज हुई डिजिटल राजनीति की बहस, कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर बढ़ा विवाद..

सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया “कॉकरोच जनता पार्टी” अभियान अब राजनीतिक बहस का विषय बनता जा रहा है। केंद्रीय मंत्री के एक बयान के बाद इस डिजिटल अभियान को लेकर विवाद और तेज हो गया है। यह मामला युवाओं की भागीदारी, सोशल मीडिया प्रभाव और ऑनलाइन आंदोलनों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।

विदेशी प्रभाव वाले फॉलोअर्स को लेकर उठी चर्चा

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने हाल ही में संकेत देते हुए कहा कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विदेशी ताकतों के प्रभाव के जरिए लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश करते हैं। बयान में पाकिस्तान और विदेशी प्रभाव जैसे संदर्भ भी सामने आए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास बड़ी युवा आबादी है और किसी भी मंच को लोकप्रिय होने के लिए वास्तविक भारतीय फॉलोअर्स मिल सकते हैं। हालांकि उन्होंने सीधे किसी विशेष प्लेटफॉर्म या अभियान का नाम नहीं लिया।

अभिजीत दिपके ने उठाए सवाल

इसके बाद डिजिटल अभियान से जुड़े Abhijeet Dipke ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि उनके प्लेटफॉर्म के अधिकांश फॉलोअर्स भारत से जुड़े हुए हैं।

दिपके ने सवाल उठाया कि बिना ठोस जानकारी के भारतीय युवाओं को विदेशी प्रभाव से जोड़कर देखना कितना उचित है। उन्होंने कहा कि उनके मंच से जुड़े लोग रोजगार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर अपनी बात रख रहे हैं।

कैसे शुरू हुआ “कॉकरोच जनता पार्टी” अभियान?

यह अभियान शुरुआत में एक व्यंग्यात्मक डिजिटल ट्रेंड के रूप में सामने आया था। सोशल मीडिया पर कुछ टिप्पणियों के बाद “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्द तेजी से वायरल होने लगे।

बाद में इन टिप्पणियों को लेकर स्पष्टीकरण भी दिया गया कि उनका संबंध कुछ विशेष मामलों से था, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर यह एक बड़े ट्रेंड का रूप ले चुका था। इसके बाद इसी नाम से एक ऑनलाइन मंच सामने आया जिसने अलग-अलग जन मुद्दों को उठाना शुरू किया।

युवाओं के मुद्दों ने दिलाया बड़ा समर्थन

समय के साथ इस अभियान ने बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, परीक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शुरू किया। इसके बाद युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।

कई सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह अभियान फॉलोअर्स और ऑनलाइन पहुंच के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ता दिखाई दिया।

NEET विवाद के दौरान बढ़ी चर्चा

NEET-UG 2026 से जुड़े विवादों और छात्रों की नाराजगी के समय इस डिजिटल मंच को अधिक समर्थन मिलने की बात कही गई। छात्रों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के कारण इसकी पहुंच और चर्चा बढ़ी।

वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स को लेकर लगाए आरोप

अभियान से जुड़े पक्ष ने आरोप लगाया है कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट प्रभावित किए गए या कुछ स्थानों पर उनकी पहुंच सीमित हुई। साथ ही धमकियां मिलने के दावे भी किए गए हैं।

हालांकि इन दावों को लेकर स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने आना जरूरी है। इस संबंध में अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दावे हैं।

कौन हैं अभिजीत दिपके?

अभिजीत दिपके को डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया अभियानों से जुड़ा बताया जाता है। वह पहले भी राजनीतिक डिजिटल अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उनका कहना है कि वे वैकल्पिक सोशल मीडिया अकाउंट्स के माध्यम से अपने अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।

सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह मामला अब केवल एक ऑनलाइन ट्रेंड तक सीमित नहीं दिख रहा। यह बहस अब इस सवाल तक पहुंच गई है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं की आवाज, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया प्रभाव भविष्य की राजनीति को किस तरह प्रभावित कर सकते हैं।