जैसलमेर में मिला प्राकृतिक गैस का नया भंडार: 950 मीटर नीचे ‘सानू फॉर्मेशन’ से निकली गैस, भारत की ऊर्जा ताकत बढ़ेगी

जैसलमेर के डांडेवाला क्षेत्र में जमीन से 950 मीटर नीचे प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला है। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने पहली बार ‘सानू फॉर्मेशन’ से गैस का सफल उत्पादन हासिल किया है।

May 25, 2026 - 12:10
जैसलमेर में मिला प्राकृतिक गैस का नया भंडार: 950 मीटर नीचे ‘सानू फॉर्मेशन’ से निकली गैस, भारत की ऊर्जा ताकत बढ़ेगी

राजस्थान के जैसलमेर जिले से देश के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। डांडेवाला क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का नया भंडार मिला है। सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने पहली बार ‘सानू फॉर्मेशन’ से सफलतापूर्वक प्राकृतिक गैस का प्रवाह हासिल किया है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 23 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी साझा करते हुए इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

950 मीटर गहराई में मिला गैस भंडार

जानकारी के अनुसार, यह गैस भंडार जमीन से करीब 950 मीटर नीचे स्थित ‘सानू फॉर्मेशन’ में मिला है। परीक्षण के दौरान यहां से प्रतिदिन लगभग 25 हजार स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCMD) प्राकृतिक गैस उत्पादन दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह खोज इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि डांडेवाला क्षेत्र में पहले गहरे कुओं से गैस निकाली जाती थी, जबकि इस बार अपेक्षाकृत कम गहराई पर नया गैस ब्लॉक मिला है।

हरदीप सिंह पुरी बोले- विदेशी आयात पर घटेगी निर्भरता

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश के भीतर प्राकृतिक गैस का नया स्रोत मिलने से भारत की विदेशी तेल और गैस आयात पर निर्भरता कम होगी।

उन्होंने ऑयल इंडिया लिमिटेड की वैज्ञानिक और तकनीकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन को मजबूती देगी।

मंत्री ने कहा कि स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों के विकास से न केवल अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि देश को साफ और पर्यावरण अनुकूल ईंधन भी मिलेगा।

गैस की क्वालिटी बेहद साफ और बेहतर

विशेषज्ञों के अनुसार, डांडेवाला क्षेत्र से निकली प्राकृतिक गैस की गुणवत्ता काफी बेहतर है। इसमें कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की मात्रा बेहद कम पाई गई है, जिससे इसे पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा स्वच्छ ईंधन माना जा रहा है।

यह गैस भविष्य में घरेलू उपयोग, उद्योगों और बिजली उत्पादन के लिए अहम भूमिका निभा सकती है।

क्या है ‘सानू फॉर्मेशन’?

भूविज्ञान में ‘फॉर्मेशन’ जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों और मिट्टी की उस परत को कहा जाता है, जो एक विशेष समयकाल में बनी होती है।

जैसलमेर बेसिन के नीचे मौजूद ‘सानू फॉर्मेशन’ मुख्य रूप से बलुआ पत्थर और गाद से बनी परत है। इसकी खासियत यह है कि यह प्राकृतिक गैस और तेल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की क्षमता रखती है। वैज्ञानिकों ने इसी परत को भेदकर नया गैस भंडार खोजा है।

पश्चिमी राजस्थान बना रणनीतिक हाइड्रोकार्बन हब

नई खोज के बाद पश्चिमी राजस्थान, खासकर जैसलमेर बेसिन की रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। यहां पहले से ही कई गैस फील्ड सक्रिय हैं और अब नई खोज ने इस क्षेत्र को देश के महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन हब के रूप में और मजबूत बना दिया है।

ऑयल इंडिया लिमिटेड के अनुसार, इस खोज के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी आधुनिक तकनीक के जरिए नए गैस भंडार तलाशने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

जैसलमेर में पहले से सक्रिय हैं कई गैस फील्ड

जैसलमेर बेसिन लंबे समय से प्राकृतिक गैस उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। यहां ऑयल इंडिया लिमिटेड, ONGC और फोकस एनर्जी जैसी कंपनियां काम कर रही हैं।

डांडेवाला के अलावा तनोट, बागीटिब्बा, मनहेरा टिब्बा, घोटारू, बांकिया और चिनैवाला टिब्बा प्रमुख गैस क्षेत्र हैं। पूरे जैसलमेर बेसिन में करीब 10.8 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस भंडार होने का अनुमान है।

गैस से बनती है बिजली

जैसलमेर क्षेत्र से निकलने वाली अधिकांश गैस रामगढ़ गैस थर्मल पावर स्टेशन को भेजी जाती है। यह राजस्थान का पहला गैस आधारित बिजलीघर है जिसकी क्षमता करीब 270.5 मेगावाट है।

गेल इंडिया की भूमिगत पाइपलाइन के जरिए गैस करीब 67 किलोमीटर दूर रामगढ़ पावर प्लांट तक पहुंचाई जाती है। यहां हर दिन 6 से 8 लाख क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई की जाती है।

इस गैस से बनने वाली बिजली का उपयोग भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर फ्लडलाइट्स, पेयजल योजनाओं, उद्योगों और स्थानीय घरों में किया जाता है।

30 साल बाद मिली नई बड़ी सफलता

डांडेवाला फील्ड की खोज पहली बार 1991-92 में हुई थी और 1996 से यहां नियमित गैस उत्पादन शुरू हुआ।

हालांकि मई 2026 में आधुनिक तकनीक से पुराने क्षेत्रों की दोबारा जांच के दौरान पहली बार कम गहराई पर स्थित सानू फॉर्मेशन में नया गैस ब्लॉक मिला। विशेषज्ञ इसे पिछले कई वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक मान रहे हैं।

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