जयपुर में अनु मीणा सुसाइड केस ने उठाए गंभीर सवाल: 38 दिन बाद FIR, पति पर दहेज प्रताड़ना और मारपीट के आरोप
जयपुर में अनु मीणा सुसाइड केस ने नया मोड़ ले लिया है। 7 अप्रैल को फांसी लगाकर जान देने वाली अनु के मामले में 38 दिन बाद FIR दर्ज हुई है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में सामने आया अनु मीणा सुसाइड केस अब गंभीर कानूनी और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। करीब 38 दिन पहले आत्महत्या करने वाली अनु मीणा के मामले में अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मृतका के परिजनों ने उसके पति गौतम मीणा पर लगातार दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
परिवार का कहना है कि अनु ने कई बार अपने साथ हो रही प्रताड़ना की जानकारी घरवालों को दी थी, लेकिन हर बार पति माफी मांगकर मामला शांत कर देता था। आखिरकार लगातार अत्याचार से परेशान होकर अनु ने आत्महत्या जैसा बड़ा कदम उठा लिया।
7 अप्रैल को की थी आत्महत्या, 15 मई को दर्ज हुई FIR
जानकारी के अनुसार अनु मीणा ने 7 अप्रैल 2026 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। हालांकि मामले में एफआईआर 15 मई को दर्ज हुई। मृतका के भाई नीरज मीणा ने जयपुर डीसीपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 128 और 85 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और घरेलू हिंसा का मामला दर्ज किया है। जांच मानसरोवर एसीपी आदित्य ककड़े को सौंपी गई है।
पति पर शराब पीकर मारपीट करने के आरोप
परिवार का आरोप है कि अनु का पति गौतम मीणा शराब पीने का आदी था और अक्सर नशे में उसके साथ मारपीट करता था। इतना ही नहीं, गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना भी लगातार जारी रहती थी।
परिजनों के मुताबिक अनु कई बार मायके वालों को फोन कर अपनी पीड़ा बताती थी। हालांकि सामाजिक दबाव और रिश्तों को बचाने की कोशिश में मामला बार-बार शांत होता रहा।
शादी में मांगे गए थे 5 लाख रुपए और होंडा सिटी कार
मृतका के परिवार ने आरोप लगाया है कि शादी के समय ही गौतम मीणा और उसके रिश्तेदारों ने दहेज में होंडा सिटी कार और 5 लाख रुपए की मांग की थी। परिवार ने यह मांग पूरी भी की थी।
परिजनों का कहना है कि शादी में करीब 60 लाख रुपए खर्च किए गए थे, इसके बावजूद अनु को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता रहा।
पंचायत और समाज के दबाव में दबता रहा मामला
मृतका के भाई नीरज ने आरोप लगाया कि जब परिवार मामला दर्ज करवाने गया तो समाज के पंच और रिश्तेदार समझौते का दबाव बनाने लगे। आरोप है कि गौतम मीणा भी पंचायत के जरिए मामले को दबाने की कोशिश कर रहा था।
हालांकि अनु के भाई ने समझौते से इनकार करते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने आखिरकार मामला दर्ज किया।
पुलिस जांच में जुटी, परिवार को न्याय का इंतजार
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। कॉल रिकॉर्ड, पारिवारिक विवाद, मेडिकल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
इस मामले ने एक बार फिर दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीर कार्रवाई होती तो शायद एक महिला की जान बचाई जा सकती थी।