कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट हैक होते ही फाउंडर बोले- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं’; जानिए 35 करोड़ साल से कैसे बचा है यह जीव
कॉकरोच जनता पार्टी के अकाउंट हैक होने के बाद ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं’ वाला बयान वायरल हो गया। जानिए आखिर 35 करोड़ साल पुराने ये जीव इतने मजबूत कैसे हैं और सिर कटने के बाद भी कैसे जिंदा रहते हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट, एक्स (X) अकाउंट और इंस्टाग्राम अकाउंट हैक होने के बाद पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने लिखा—
“कॉकरोच कभी मरते नहीं।”
यह लाइन सिर्फ मजाक या तंज नहीं, बल्कि विज्ञान भी इस बात को काफी हद तक सही साबित करता है। कॉकरोच पृथ्वी पर मौजूद सबसे पुराने और सबसे ज्यादा जीवित रहने वाले जीवों में से एक हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक कॉकरोच करीब 35 करोड़ साल पुराने जीव हैं, यानी डायनासोर से भी पहले पृथ्वी पर मौजूद थे।
कैसे पड़ा ‘कॉकरोच’ नाम?
16वीं सदी में समुद्री रास्तों की खोज के दौरान स्पेनिश नाविकों ने जहाजों में एक अजीब, चपटा और तेजी से रेंगने वाला कीड़ा देखा। उन्होंने उसे स्पेनिश शब्द “Cucaracha” कहा। धीरे-धीरे यही शब्द बदलकर “Cockroach” बन गया।
35 करोड़ साल पुराने हैं कॉकरोच
वैज्ञानिकों को अमेरिका, चीन और यूरोप में करोड़ों साल पुराने कॉकरोच के जीवाश्म मिले हैं। रिसर्च में पता चला कि प्राचीन कॉकरोच आज के कॉकरोच से काफी मिलते-जुलते थे।
आज दुनिया में कॉकरोच की करीब 4500 प्रजातियां मौजूद हैं, जिनमें से सिर्फ 30 प्रजातियां ही इंसानों के आसपास पाई जाती हैं। अंटार्कटिका को छोड़कर ये लगभग पूरी दुनिया में मिलते हैं।
13 चैम्बर्स वाला दिल और अद्भुत शरीर
कॉकरोच का शरीर बेहद मजबूत और अनोखा होता है।
- इनके पास 6 तेज दौड़ने वाले पैर होते हैं
- 2 एंटेना आसपास का माहौल पहचानते हैं
- बिना सिर घुमाए लगभग 360 डिग्री तक देख सकते हैं
- शरीर के किनारों से सांस लेते हैं
- दिल 13 चैम्बर्स में बंटा होता है
कॉकरोच अपनी बॉडी के अनुपात में इंसानों से कई गुना तेज दौड़ सकते हैं।
? सिर कटने के बाद भी जिंदा रहते हैं
कॉकरोच की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिर कटने के बाद भी वे कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं। दरअसल, उनका दिमाग सिर्फ सिर में नहीं होता। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में नर्व सिस्टम फैला होता है। साथ ही वे शरीर के छोटे-छोटे छिद्रों से सांस लेते हैं, इसलिए सिर कटने के बाद भी तुरंत नहीं मरते।
न्यूक्लियर रेडिएशन भी झेल सकते हैं?
लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि परमाणु हमले के बाद भी कॉकरोच बच सकते हैं। वैज्ञानिक प्रयोगों में पाया गया कि कॉकरोच इंसानों की तुलना में कहीं ज्यादा रेडिएशन सहन कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वे पूरी तरह अमर नहीं हैं, लेकिन जमीन के अंदर छिपने और कम ऊर्जा में जीवित रहने की क्षमता उन्हें बेहद मजबूत बनाती है।
कुछ भी खा सकते हैं
कॉकरोच सर्वाहारी होते हैं। वे खाना, कागज, साबुन, गोंद, सड़ी लकड़ी और यहां तक कि मरे हुए कॉकरोच भी खा सकते हैं। उनका पाचन तंत्र इतना शक्तिशाली होता है कि कई तरह के जहरीले पदार्थ भी सहन कर लेते हैं।
बिना नर के भी बच्चे पैदा कर सकती है मादा
मादा कॉकरोच बिना मेटिंग के भी प्रजनन कर सकती है। इस प्रक्रिया को “पार्थेनोजेनेसिस” कहा जाता है। यही वजह है कि कॉकरोच की आबादी बहुत तेजी से बढ़ती है।
दवाओं और रिसर्च में भी उपयोग
वैज्ञानिक अब कॉकरोच पर कई तरह की रिसर्च कर रहे हैं।
- कॉकरोच से एंटीबायोटिक दवाएं बनाने पर अध्ययन जारी है
- जापान साइबोर्ग कॉकरोच तकनीक पर काम कर रहा है
- कॉकरोच मिल्क को भविष्य का “सुपरफूड” माना जा रहा है
नापसंद होने के बावजूद जरूरी
हालांकि घरों में दिखने वाले कॉकरोच बीमारी फैलाने वाले जीव माने जाते हैं, लेकिन प्रकृति में इनकी अहम भूमिका है। ये सड़ी-गली चीजों को खत्म कर मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करते हैं और कई छोटे जीवों का भोजन भी हैं।