36 लाख की नौकरी छोड़ी… अब शादी क्यों? IIT बाबा की नई लीला, पीछे की वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!
कहते हैं.. किस्मत जब करवट लेती है तो इंसान की कहानी भी इतिहास बन जाती हैI आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी कहानी जिसमें है IIT की पढ़ाई, करोड़ों के सपनों वाला करियर, अध्यात्म की राह और अब एक नई शुरुआत—शादी की! हरियाणा के झज्जर के रहने वाले अभय सिंह जिन्हें आज पूरा देश IIT बाबा के नाम से जानता हैI उन्होंने करीब 36 लाख सालाना पैकेज की नौकरी कीI इसके बाद सबकुछ छोड़ निकल पड़े अध्यात्म की राह पर और वो बन गए—IIT वाले बाबा...लेकिन अब उनकी जिंदगी में आया है एक और बड़ा मोड़…“जहां अध्यात्म था… वहीं अब प्रेम की एंट्री हुई…”
कहते हैं किस्मत जब करवट लेती है तो इंसान की कहानी भी इतिहास बन जाती है।हरियाणा के झज्जर से निकलकर देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT Bombay तक पहुंचने वाले अभय सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है—जहां हर मोड़ पर जिंदगी ने नया रंग दिखाया।
बड़े सपने, बड़ा करियर और विदेश में शानदार नौकरी
एक समय था जब अभय सिंह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। कनाडा में करीब 36 लाख रुपये सालाना पैकेज, सब कुछ उनके पास था.. लेकिन कहते हैं—“जहां मन को सुकून ना मिले, वहां लाखों भी बेकार लगते हैं।” और शायद यही अहसास उन्हें एक अलग रास्ते पर ले गया। उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया… और निकल पड़े अध्यात्म की राह पर। साल 2025 में महाकुंभ 2025, प्रयागराज के दौरान जब वह संन्यासी वेश में नजर आए… तो लोगों के लिए यह किसी चौंकाने वाली कहानी से कम नहीं था। IIT से पढ़ा युवक, बाबा के रूप में! उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ… और वहीं से उन्हें नाम मिला—IIT बाबा।
मंदिर, शादी और कोर्ट मैरिज का सच
लेकिन अब उनकी जिंदगी में आया है एक और बड़ा मोड़…“जहां अध्यात्म था… वहीं अब प्रेम ने भी दस्तक दे दी।” अभय सिंह ने प्रीतिका से शादी कर ली है… जो कर्नाटक के मंगलूरु की रहने वाली हैं और खुद भी एक इंजीनियर हैं। दोनों की मुलाकात कोयंबटूर में सद्गुरु के आश्रम, आदियोगी परिसर में हुई और जैसा कहा जाता है। जब सोच मिल जाए… तो रिश्ते बनने में वक्त नहीं लगता। इसके बाद 15 फरवरी 2026 को हिमाचल प्रदेश के एक मंदिर में दोनों ने सात फेरे लिए… और 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज के जरिए इस रिश्ते को आधिकारिक रूप दे दिया। शादी के बाद दोनों झज्जर पहुंचे… जहां अभय सिंह ने अपने माता-पिता से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया।
अब सवाल ये है कि आगे क्या?
तो IIT बाबा का कहना है कि यह सफर सिर्फ शादी तक सीमित नहीं है। वे और प्रीतिका मिलकर “श्री यूनिवर्सिटी” नाम के एक कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं… जहां लोगों को अध्यात्म, साधना और ज्ञान से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। यानी एक ऐसा मंच जहां विज्ञान और अध्यात्म एक साथ चलें।
परिवार को लेकर IIT बाबा का क्या कहना है?
हालांकि, जब उनसे परिवार को लेकर सवाल किया गया… तो उनका जवाब भी उतना ही अलग था। उन्होंने कहा—“अगर हम सांसारिक चीजों में ज्यादा उलझ गए… तो अध्यात्म का रास्ता छूट जाएगा।” अभय सिंह की यह कहानी सिर्फ एक IITian की नहीं है… बल्कि उस सोच की मिसाल है, जहां इंसान अपने दिल की सुनता है और भीड़ से अलग रास्ता चुनता है।