पिता की चिता ठंडी होने से पहले बेटे की भी सजानी पड़ी चिता, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़.

कोटा के हरिओम नगर में एक मजदूर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लकवे से पीड़ित पिता पूरी लाल बैरवा (50) की मंगलवार को मौत हो गई। उनके अंतिम संस्कार के महज दो घंटे बाद, पिता के गम में डूबे बेटे राजू बैरवा (25) को हार्ट अटैक ने छीन लिया। गरीब परिवार के लिए दो चिताओं का खर्च उठाना मुश्किल था, लेकिन पड़ोसियों ने चंदा जुटाकर अंतिम संस्कार कराया। अब मां गुड्डी और 13 साल का बेटा अरविंद अकेले रह गए, जिनके सामने अनिश्चित भविष्य है। यह हृदयविदारक घटना हर किसी को झकझोर गई।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
September 3, 2025 • 9:21 PM  5
र
राजस्थान
NEWS CARD
Logo
पिता की चिता ठंडी होने से पहले बेटे की भी सजानी पड़ी चिता, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़.
“पिता की चिता ठंडी होने से पहले बेटे की भी सजानी पड़ी चिता, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़.”
Favicon
Read more on thekhatak.com
3 Sep 2025
https://www.thekhatak.com/pita-ki-chita-thandi-hone-se-pehle-bete-ki-bhi-sajani-padi-chita-parivar-par-toota-dukhon-ka-pahad
Google News
Copied
पिता की चिता ठंडी होने से पहले बेटे की भी सजानी पड़ी चिता, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़.

राजस्थान के कोटा शहर के हरिओम नगर कच्ची बस्ती में एक ऐसी दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर सुनने वाले की आंखें नम कर दीं। एक मजदूर परिवार के सिर पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब पिता की मौत के कुछ ही घंटों बाद उनके जवान बेटे ने भी हार्ट अटैक के कारण दम तोड़ दिया। इस गरीब परिवार की आर्थिक तंगी ऐसी थी कि दोनों के अंतिम संस्कार के लिए आसपास के लोगों को चंदा जुटाना पड़ा। यह कहानी न केवल दुख और हानि की है, बल्कि मानवीय संवेदना और सामुदायिक एकजुटता की भी मिसाल है।

पिता की लकवे से मौत, शुरू हुआ दुख का सिलसिला

हरिओम नगर कच्ची बस्ती में रहने वाले पूरी लाल बैरवा (50) एक मेहनतकश मजदूर थे, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे। कई दिनों से वह लकवे की बीमारी से जूझ रहे थे। मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ले ली। परिवार ने गमगीन माहौल में पूरी लाल का अंतिम संस्कार किया, लेकिन यह दुख उनके लिए बस शुरुआत थी।

बेटे का दिल नहीं बर्दाश्त कर पाया पिता की मौत का सदमा

पूरी लाल का बड़ा बेटा राजू बैरवा (25) पिता की मौत से गहरे सदमे में था। पिता की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि महज दो घंटे बाद राजू को अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। यह हार्ट अटैक था, जिसने इस युवा की जिंदगी छीन ली। परिवार के लिए यह दोहरा आघात असहनीय था। एक ही दिन में पिता और बेटे, दोनों को खोने का दर्द इतना गहरा था कि मोहल्ले में हर कोई स्तब्ध रह गया। पिता की चिता के पास ही बेटे की चिता सजाने का हृदयविदारक दृश्य देखकर हर आंख नम हो उठी।

आर्थिक तंगी में डूबा परिवार, पड़ोसियों ने बढ़ाया सहारा

पूरी लाल और राजू की मौत ने परिवार को भावनात्मक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी तोड़ दिया। मजदूरी पर निर्भर इस परिवार के पास दो चिताओं के अंतिम संस्कार का खर्च उठाने तक के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में आसपास के लोग और परिचित आगे आए। मोहल्ले वालों ने चंदा जुटाकर पिता-पुत्र के अंतिम संस्कार का इंतजाम किया। यह सामुदायिक एकजुटता उस परिवार के लिए एकमात्र सहारा बनी, जो अपने दो मजबूत स्तंभ खो चुका था।

इस त्रासदी के बाद बैरवा परिवार में अब केवल मां गुड्डी और उनका 13 वर्षीय छोटा बेटा अरविंद बचे हैं। पति और बड़े बेटे को एक ही दिन में खोने का दुख गुड्डी के लिए असहनीय है। वह रो-रोकर बेसुध हो चुकी हैं। दूसरी ओर, मासूम अरविंद के सामने अब अनिश्चित भविष्य खड़ा है। उसे समझ नहीं आ रहा कि इस दुख की घड़ी में उसका और उसकी मां का सहारा कौन बनेगा। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक है, और अब गुड्डी और अरविंद के सामने जीवन की नई चुनौतियां हैं।

कोटा की कच्ची बस्ती में गूंजा दर्द

यह घटना कोटा के हरिओम नगर कच्ची बस्ती में न केवल एक परिवार की त्रासदी बनकर सामने आई, बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। लोग इस बात से स्तब्ध हैं कि एक परिवार को इतने कम समय में इतना बड़ा नुकसान कैसे सहना पड़ सकता है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद से भले ही अंतिम संस्कार हो गया, लेकिन इस परिवार के सामने अब जीवन की कठिन राह है।

समाज से अपील: संवेदना और सहयोग की जरूरत

यह दुखद घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज के कमजोर वर्गों को कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बैरवा परिवार जैसे कई परिवार आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस परिवार को अब न केवल भावनात्मक समर्थन की जरूरत है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक सहयोग भी चाहिए, ताकि गुड्डी और अरविंद अपने जीवन को फिर से संवार सकें।

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter