'मैं तो कहूंगा जाति पूछकर गोली मारो…', एनकाउंटर पर CM सम्राट चौधरी का बड़ा बयान
बिहार में लगातार हो रहे एनकाउंटर को लेकर सियासत गरमा गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के आरोपों पर तंज कसते हुए कहा कि “जाति पूछकर गोली चलाओ।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
बिहार में हाल के दिनों में अपराधियों और पुलिस के बीच लगातार हो रहे एनकाउंटर अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गए हैं। पटना, सीवान, किशनगंज और समस्तीपुर समेत कई जिलों में पुलिस कार्रवाई के दौरान हुए “हाफ एनकाउंटर” को लेकर विपक्ष पहले से ही सवाल उठा रहा था। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान ने पूरे मुद्दे को और गरमा दिया है।
गुरुवार को एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के आरोपों पर कटाक्ष करते हुए कहा,
“कुछ लोग पूछ रहे हैं कि एनकाउंटर में जाति भी पूछनी चाहिए… मैं तो पुलिस वालों से कहूंगा कि पूछो… जाति पूछकर ही गोली चलाओ।”
मुख्यमंत्री का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। माना जा रहा है कि उनका यह तंज विपक्ष, खासकर तेजस्वी यादव के हालिया आरोपों के जवाब में आया है।
“48 घंटे में जवाब दीजिए”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को सुशासन के लिए जाना जाना चाहिए और कानून व्यवस्था से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस को साफ निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई अपराधी पुलिस को चुनौती देता है, तो उसे 48 घंटे के भीतर जवाब दिया जाए।
उन्होंने कहा,
“पुलिस सुशासन के लिए होती है, सख्ती के लिए होती है। अपराधी किसी भी हालत में बचना नहीं चाहिए।”
तेजस्वी यादव ने उठाए थे सवाल
कुछ दिन पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार में हो रहे एनकाउंटर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस कार्रवाई में जाति विशेष को निशाना बनाया जा रहा है।
तेजस्वी ने कहा था कि सरकार बताए कि किन मामलों में कार्रवाई हुई और किन लोगों को बचाया जा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा था कि “जिसके साथ अपराध हुआ उसकी जाति देखिए और जिसने अपराध किया उसकी भी जाति देखिए।”
बिहार में एनकाउंटर पर बढ़ी बहस
लगातार हो रही पुलिस मुठभेड़ों और उस पर राजनीतिक बयानबाजी के बाद बिहार में कानून व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक और जातीय नजरिए से देख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल के बीच इस तरह के बयान आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को और गर्मा सकते हैं।