क्या 5 जून को लगेगा बड़ा झटका? रुपये की गिरावट से बढ़ी टेंशन, EMI महंगी करने की तैयारी में RBI!
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI रुपये को संभालने के लिए रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर रहा है। ऐसा होने पर होम लोन, कार लोन और अन्य EMI महंगी हो सकती हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अब तक दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है और आगे भी कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच आम लोगों के लिए एक और बड़ी चिंता सामने आई है।
भारतीय रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो रुपया जल्द ही डॉलर के मुकाबले 100 के स्तर को पार कर सकता है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को संभालने के लिए कई बड़े कदम उठाने की तैयारी में जुट गया है।
रुपये में बड़ी गिरावट से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में भारतीय रुपये में करीब 10 से 12 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार को रुपया 97 के करीब पहुंच गया, जिसके बाद आरबीआई और वित्तीय जगत में चिंता बढ़ गई।
रिपोर्ट के अनुसार, रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हालात की समीक्षा के लिए आंतरिक बैठकें कीं और संभावित उपायों पर चर्चा की।
RBI बढ़ा सकता है रेपो रेट
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक रुपये को स्थिर करने के लिए आरबीआई रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर रहा है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। यदि इसमें बढ़ोतरी होती है तो बैंक भी ग्राहकों के लिए लोन महंगे कर देते हैं।
ऐसे में होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन समेत सभी प्रकार की EMI बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ेगा, जो पहले से महंगाई की मार झेल रहे हैं।
5 जून की बैठक पर टिकी नजर
आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक 3 से 5 जून के बीच होने वाली है। फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर है, लेकिन कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बढ़ती आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की जा सकती है।
यदि ऐसा होता है तो बैंक लोन की ब्याज दरें बढ़ेंगी और लाखों लोगों की मासिक EMI में इजाफा हो जाएगा।
डॉलर जुटाने की भी तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई सिर्फ रेपो रेट बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।
इनमें एनआरआई डिपॉजिट स्कीम के जरिए विदेशों से डॉलर जुटाना और सॉवरेन डॉलर बॉन्ड जारी करना शामिल है। माना जा रहा है कि इस योजना के जरिए भारत को करीब 50 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा मिल सकती है।
2013 जैसी रणनीति अपनाने की तैयारी
विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, वे काफी हद तक 2013 के 'टेपर टैंट्रम' संकट के दौरान अपनाई गई रणनीतियों जैसे हैं।
उस समय भी भारत ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए एनआरआई डिपॉजिट स्कीम शुरू की थी, जिससे करीब 30 अरब डॉलर जुटाए गए थे। इस बार आरबीआई इससे भी ज्यादा विदेशी निवेश और डॉलर फ्लो की उम्मीद कर रहा है।
आम आदमी पर दोहरी मार
अगर आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ती हैं और साथ ही रेपो रेट में भी इजाफा होता है, तो आम आदमी पर दोहरी मार पड़ सकती है।
एक तरफ रोजमर्रा के खर्च बढ़ेंगे, वहीं दूसरी तरफ घर, गाड़ी और अन्य जरूरी लोन की EMI भी महंगी हो जाएगी। ऐसे में महंगाई का दबाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।