अटेंडेंस बढ़ाने की कीमत 20 हजार! टोंक यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसर रिश्वत लेते गिरफ्तार

राजस्थान के टोंक जिले में ACB ने डॉ. के.एन. मोदी यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसरों को बीएड छात्र से अटेंडेंस बढ़ाने और एडमिट कार्ड देने के बदले 20 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। छात्र की शिकायत पर कार्रवाई की गई।

May 22, 2026 - 15:35
अटेंडेंस बढ़ाने की कीमत 20 हजार! टोंक यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसर रिश्वत लेते गिरफ्तार

राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने टोंक जिले के निवाई स्थित डॉ. के.एन. मोदी विश्वविद्यालय में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो प्रोफेसरों को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों शिक्षकों ने बीएड के एक छात्र से उसकी अनुपस्थिति को सही करने, अटेंडेंस बढ़ाने और मुख्य परीक्षा में बैठाने के लिए एडमिट कार्ड जारी कराने के बदले रिश्वत मांगी थी।

यह कार्रवाई शिक्षा संस्थानों में फैले भ्रष्टाचार को लेकर एक बड़ा खुलासा मानी जा रही है। एसीबी की इस ट्रैप कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया।

छात्र की शिकायत के बाद हरकत में आई ACB

एसीबी के महानिदेशक पुलिस गोविंद गुप्ता के अनुसार, वर्ष 2024-26 के बीएड कोर्स में पढ़ रहे एक छात्र ने शिकायत दी थी। छात्र ने आरोप लगाया कि एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मीनू गंगल और असिस्टेंट प्रोफेसर रमेश चंद मीणा ने उससे 23 हजार रुपए रिश्वत की मांग की।

छात्र का कहना था कि यदि वह पैसे नहीं देगा तो उसकी अनुपस्थिति सही नहीं की जाएगी और उसे मुख्य परीक्षा में बैठने के लिए प्रवेश पत्र भी जारी नहीं किया जाएगा।

ऐसे बिछाया गया ट्रैप

शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टोंक इकाई ने मामले का सत्यापन किया। इसके बाद अजमेर रेंज के उप महानिरीक्षक नारायण टोगस की निगरानी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा के नेतृत्व में ट्रैप टीम गठित की गई।

जांच के दौरान आरोप सही पाए गए। तय योजना के अनुसार छात्र प्रोफेसरों के संपर्क में रहा। इसी दौरान डॉ. मीनू गंगल ने अपने कार्यालय में सहयोगी रमेश चंद मीणा को छात्र से 20 हजार रुपए लेने के लिए कहा।

रमेश मीणा ने रिश्वत की रकम हाथों से गिनकर अपनी पैंट की जेब में रख ली। तभी पहले से मौजूद ACB टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

जेब से बरामद हुई रिश्वत की रकम

एसीबी अधिकारियों ने आरोपी प्रोफेसर की जेब से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली। इसके बाद दोनों शिक्षकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।

एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में मामले की आगे जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच की जाएगी कि क्या विश्वविद्यालय में पहले भी इसी तरह छात्रों से अवैध वसूली की जाती रही है।

शिक्षा संस्थानों में भ्रष्टाचार पर उठे सवाल

इस घटना ने निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली और छात्रों पर बनाए जाने वाले दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों में इस तरह की रिश्वतखोरी शिक्षा व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास दोनों प्रभावित होंगे।

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