धौलपुर में 8 पुलिसकर्मी भगोड़ा घोषित: 7 साल तक कोर्ट में पेश नहीं हुए, स्थायी वारंट जारी
धौलपुर जिले के जमालपुरा गांव में घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ और लूटपाट के मामले में बाड़ी एसीजेएम-2 कोर्ट ने 8 पुलिसकर्मियों को भगोड़ा घोषित कर उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किए हैं।
राजस्थान के धौलपुर जिले से पुलिस विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। बाड़ी एसीजेएम-2 कोर्ट ने करीब 7 साल से न्यायिक प्रक्रिया से बच रहे 8 पुलिसकर्मियों को भगोड़ा घोषित करते हुए उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किए हैं। मामला कंचनपुर थाना क्षेत्र के जमालपुरा गांव में घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ और नकदी ले जाने से जुड़ा है।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि आरोपी पुलिसकर्मी लंबे समय तक धौलपुर जिले में पदस्थापित रहने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए। इतना ही नहीं, कोर्ट द्वारा जारी जमानती वारंट और गिरफ्तारी वारंट को भी गंभीरता से नहीं लिया गया। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना माना है।
2015 में हुई थी घटना
परिवादी और अधिवक्ता होतम सिंह खटाना के अनुसार, 4 नवंबर 2015 को वे अपने परिवार के साथ गांव जमालपुरा स्थित घर पर मौजूद थे। उसी दौरान दो गाड़ियों में सवार होकर कोबरा टीम, डीएसटी और कंचनपुर थाना पुलिस गांव में दबिश देने पहुंची थी। उस समय कंचनपुर थाने के तत्कालीन SHO हरी सिंह मीणा भी टीम के साथ मौजूद थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्रवाई से लौटते समय पुलिसकर्मियों ने घर के बाहर बैठे उनके भाई को थप्पड़ मार दिया। विरोध करने पर पुलिसकर्मी घर में घुस गए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की भी की गई।
परिवादी ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने घर में रखा सामान भी तोड़ा और नकदी सहित अन्य सामान लेकर चले गए। मौके पर मौजूद तत्कालीन SHO हरी सिंह मीणा ने बाद में पुलिसकर्मियों को रोकते हुए वापस भेजा।
थाने में रिपोर्ट नहीं हुई दर्ज
होतम सिंह खटाना का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने तत्कालीन SHO हरी सिंह मीणा से शिकायत की और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन मामला कोबरा टीम से जुड़ा होने और टीम के सीधे एसपी के निर्देश पर काम करने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण लेते हुए बाड़ी एसीजेएम-2 कोर्ट में परिवाद दायर किया।
2018 में कोर्ट ने लिया था संज्ञान
मामले में अदालत ने 6 दिसंबर 2018 को संज्ञान लेते हुए 8 पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी किए थे। इनमें विनोद शर्मा, राकेश कुमार मीणा, प्रद्युम्न सिंह, हरिओम मीना, विनोद कुमार, जितेंद्र मीणा, रामनाथ और राजपाल शामिल हैं।
कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, इन सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ समय-समय पर जमानती और गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए, लेकिन कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी लगातार न्यायिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास करते रहे।
कोर्ट ने कहा- न्यायिक प्रक्रिया से बचते रहे आरोपी
21 मई को बाड़ी एसीजेएम-2 कोर्ट की मजिस्ट्रेट चित्राक्षी सिंह ने सभी आरोपियों को भगोड़ा घोषित करते हुए उनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी कर दिए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पुलिसकर्मी कथित राजीनामे और राजकार्य में व्यस्त होने जैसे आधारों का हवाला देकर गिरफ्तारी और पेशी से बचते रहे।
अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए डीजीपी राजस्थान और भरतपुर रेंज आईजी को भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पुलिस विभाग में मचा हड़कंप
कोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। लंबे समय तक न्यायिक आदेशों की अनदेखी करने वाले पुलिसकर्मियों पर अदालत की सख्ती को प्रशासनिक जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और विभागीय कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।