22 से 26 मई के बीच केरल पहुंचेगा मानसून,जुलाई-सितंबर में बारिश के बीच लंबे गैप की आशंका
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून समय से पहले केरल पहुंच सकता है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी रहने की आशंका जताई गई है।
देशभर में भीषण गर्मी के बीच राहत देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून 22 से 26 मई के बीच केरल पहुंच सकता है, जो इसकी सामान्य तारीख 1 जून से पहले होगी। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने इस बार मानसून की रफ्तार को लेकर चिंता जताई है। अनुमान है कि मानसून पूरे देश को कवर करने में सामान्य से कहीं ज्यादा समय ले सकता है।
फिलहाल मानसून अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी हिस्से इंदिरा पॉइंट से लेकर उत्तरी हिस्से तक सक्रिय हो चुका है। मानसूनी रेखा का पश्चिमी सिरा मालदीव पार करते हुए श्रीलंका के कोलंबो के पास से गुजर रहा है, जबकि इसका पूर्वी भाग बंगाल की खाड़ी में सक्रिय है।
लंबे ब्रेक बढ़ा सकते हैं परेशानी
मौसम विभाग और निजी एजेंसियों का मानना है कि इस बार मानसून लगातार सक्रिय रहने के बजाय कई बार रुक सकता है। जून से सितंबर के बीच 7 से 14 दिन तक के लंबे “मानसून ब्रेक” देखने को मिल सकते हैं। यानी कई क्षेत्रों में लगातार बारिश के बजाय लंबे अंतराल के बाद बारिश होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की यही सुस्त चाल खेती, जलस्रोतों और बिजली उत्पादन पर असर डाल सकती है। खासतौर पर उन राज्यों में चिंता ज्यादा है जहां खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती है।
2002 जैसे हालात का डर
स्काईमेट वेदर के अध्यक्ष जीपी शर्मा के मुताबिक इस बार हालात 2002 जैसे बनने का खतरा नजर आ रहा है। उस साल मानसून 29 मई को केरल पहुंच गया था, लेकिन पूरे देश में फैलने में 79 दिन लग गए थे। दिल्ली में मानसून 15 जुलाई को पहुंचा था और राजस्थान तक पहुंचने में लगभग एक महीना और लग गया था।
2002 देश के लिए गंभीर सूखे वाला साल साबित हुआ था। उस दौरान सामान्य से केवल 81 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई थी। सामान्य तौर पर मानसून पूरे भारत को 35 से 38 दिनों में कवर कर लेता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रहने की संभावना जताई जा रही है।
किन राज्यों में कम बारिश की आशंका
मौसम विभाग ने इस सीजन में औसत से करीब 8 प्रतिशत कम बारिश का अनुमान जताया है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में सामान्य से कम बारिश की संभावना है।
महीनेवार अनुमान
जून: लगभग सामान्य बारिश
जुलाई: करीब 5% तक कमी की आशंका
अगस्त: कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश संभव
सितंबर: 8 से 11% तक कम बारिश का अनुमान
विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई और सितंबर में बारिश की कमी खेती और खरीफ फसलों पर असर डाल सकती है।
प्री-मानसून एक्टिविटी से बढ़ी उम्मीद
अरब सागर में सक्रिय बादलों का बड़ा समूह पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ रहा है। इसके असर से लक्षद्वीप, केरल, तमिलनाडु और तटीय कर्नाटक में अगले तीन से चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना है। इसे प्री-मानसून एक्टिविटी माना जा रहा है और इसी वजह से मानसून के समय से पहले केरल पहुंचने की उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती तेजी के बावजूद मानसून आगे बढ़ने में सुस्त पड़ सकता है। ऐसे में किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और राज्य सरकारों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।