ईंधन और खाद्य संकट से जूझ रहा पाकिस्तान, महंगाई दर 12% के पार जाने की आशंका
पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक मई 2026 में महंगाई दर 12.2% तक पहुंच सकती है। पेट्रोल-डीजल, गेहूं, आटा और दूध की कीमतों में तेजी को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
पाकिस्तान में आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई आम लोगों के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है। बिजली दरों में कुछ कमी के बावजूद पेट्रोल-डीजल और खाने-पीने की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में पाकिस्तान की सालाना महंगाई दर 12.2 फीसदी तक पहुंच सकती है।
ऑप्टिमस कैपिटल मैनेजमेंट द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान का राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (NCPI) मासिक आधार पर करीब 1 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। वहीं, मूल मुद्रास्फीति लगभग 8.4 फीसदी पर बनी रह सकती है।
ईंधन की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घरेलू ईंधन की कीमतों में करीब 9.5 फीसदी की बढ़ोतरी होने की आशंका है। इसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परिवहन सूचकांक में मासिक आधार पर लगभग 6.9 फीसदी की भारी वृद्धि दर्ज हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव और ईरान युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन पाकिस्तान में प्रीमियम बढ़ने और अंतर्देशीय माल ढुलाई समतुल्यता मार्जिन (IFEM) समायोजन के कारण ईंधन महंगा बना हुआ है।
ऊर्जा मुद्रास्फीति में 39% तक उछाल का अनुमान
रिपोर्ट के मुताबिक मई में ऊर्जा मुद्रास्फीति सालाना आधार पर लगभग 39 फीसदी तक बढ़ सकती है। इसका असर सिर्फ परिवहन पर ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के सामान और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होती है, जिसका सीधा प्रभाव खाद्य पदार्थों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
बिजली दरों में कमी से मिली थोड़ी राहत
रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली की दरों में कमी के कारण आवास सूचकांक में मासिक आधार पर लगभग 1.2 फीसदी की गिरावट आ सकती है। इससे लोगों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन यह राहत महंगाई के बड़े दबाव को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य और ईंधन की कीमतों में तेजी का असर बिजली दरों में कमी से मिलने वाली राहत पर भारी पड़ रहा है।
गेहूं, आटा और दूध के दाम भी बढ़े
ऑप्टिमस कैपिटल मैनेजमेंट के विश्लेषक यासीन इकबाल कोडवावी के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति में पहले जो नरमी दिखाई दे रही थी, वह अब खत्म होती नजर आ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य मुद्रास्फीति में मासिक आधार पर करीब 1.5 फीसदी और सालाना आधार पर लगभग 9 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है। इसका मुख्य कारण गेहूं और गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतें हैं।
बताया जा रहा है कि इस महीने गेहूं और आटे की कीमतों में करीब 7 फीसदी तक उछाल आ सकता है। इसके अलावा ताजा दूध और डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी लगभग 2.7 फीसदी वृद्धि की संभावना जताई गई है।
आम जनता पर बढ़ता दबाव
पाकिस्तान पहले से आर्थिक संकट, विदेशी कर्ज और कमजोर मुद्रा जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में लगातार बढ़ती महंगाई आम जनता के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईंधन और खाद्य कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रही तो आने वाले महीनों में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।