खनन मजदूरों के मुद्दे पर एक सुर में दिखे रविंद्र सिंह भाटी और हरीश चौधरी, सरकार पर बढ़ा समाधान का दबाव

राजस्थान में खनन कार्य से जुड़े मजदूरों और ड्राइवरों की मांगों को लेकर राजनीति तेज हो गई है। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी जहां आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं, वहीं बायतु विधायक हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर इन्हीं मुद्दों के समाधान की मांग की है। दोनों नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक रास्तों के बावजूद मुद्दों पर समान सोच दिखाई दे रही है।

May 19, 2026 - 12:44
खनन मजदूरों के मुद्दे पर एक सुर में दिखे रविंद्र सिंह भाटी और हरीश चौधरी, सरकार पर बढ़ा समाधान का दबाव

राजस्थान के पश्चिमी इलाके में खनन कार्य से जुड़े मजदूरों और वाहन चालकों की समस्याओं को लेकर अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी लगातार आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के जरिए सरकार तक आवाज पहुंचाने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर बायतु विधायक हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर इन्हीं मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।

इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि खनन क्षेत्र से जुड़े मुद्दे अब केवल स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक समर्थन हासिल कर रहे हैं। खास बात यह है कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा और शैली रखने वाले दोनों नेता मजदूरों और ड्राइवरों की समस्याओं को लेकर एक जैसी चिंता जाहिर करते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, खनन कार्य में लगे हजारों मजदूर और वाहन चालक लंबे समय से रोजगार, सुरक्षा, परिवहन व्यवस्था, रॉयल्टी नियमों और प्रशासनिक सख्ती जैसे मुद्दों को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती पाबंदियों और कार्रवाई के कारण उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कई इलाकों में ट्रकों और डंपरों के संचालन पर प्रभाव पड़ा है, जिससे मजदूरों की आय भी प्रभावित हुई है।

इन्हीं मांगों को लेकर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने आंदोलन का रास्ता अपनाया। भाटी लगातार सरकार से खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों को राहत देने, प्रशासनिक कार्रवाई में नरमी बरतने और रोजगार प्रभावित नहीं होने देने की मांग कर रहे हैं। उनके आंदोलन को स्थानीय स्तर पर मजदूरों और ड्राइवरों का समर्थन भी मिल रहा है।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता और बायतु विधायक हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए त्वरित समाधान की मांग की है। चौधरी ने पत्र में कहा कि हजारों परिवार सीधे तौर पर इस काम पर निर्भर हैं और यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों नेताओं की पहल से सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। भले ही दोनों अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते हों, लेकिन मजदूरों और ड्राइवरों के मुद्दों पर उनकी सोच का मेल साफ दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि अब यह मामला केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

खनन क्षेत्र राजस्थान की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग पर निर्भर हैं। ऐसे में मजदूरों और ड्राइवरों की मांगों को लेकर उठ रही आवाजों को सरकार किस तरह संभालती है, इस पर आने वाले दिनों में सभी की नजरें रहेंगी।

फिलहाल, एक तरफ आंदोलन और दूसरी तरफ राजनीतिक पत्राचार ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों की समस्याओं को अब नजरअंदाज करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

Kashish Sain Bringing truth from the ground राजस्थान और देश-दुनिया की ताज़ा, सटीक और भरोसेमंद खबरें सरल और प्रभावी अंदाज़ में प्रस्तुत करना, ताकि हर पाठक तक सही जानकारी समय पर पहुँच सके।