ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, सूने मकान से चल रहा था रैकेट..युवाओं को झांसे में लेकर लाखों की ठगी का आरोप

बाड़मेर शहर के रामनगर इलाके में पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। डीएसटी और रीको थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लैपटॉप, 11 मोबाइल, फर्जी सिम कार्ड और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

May 26, 2026 - 14:13
ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, सूने मकान से चल रहा था रैकेट..युवाओं को झांसे में लेकर लाखों की ठगी का आरोप

राजस्थान के बाड़मेर जिले में ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। शहर के रामनगर इलाके में एक सूने मकान से संचालित किए जा रहे इस रैकेट पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार, डीएसटी और रीको थाना पुलिस की संयुक्त टीम को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि रामनगर क्षेत्र के एक खाली पड़े मकान में कुछ लोग ऑनलाइन गेमिंग के जरिए युवाओं को जाल में फंसाकर ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से मकान पर दबिश दी।

मौके से दो आरोपी हिरासत में

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से पूनमाराम और देवाराम नाम के दो आरोपियों को डिटेन किया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और इंटरनेट संसाधनों का इस्तेमाल कर विभिन्न ऑनलाइन गेम संचालित कर रहे थे। इन गेम्स के जरिए लोगों को लालच देकर पैसे निवेश करवाए जाते थे और बाद में उनसे ठगी की जाती थी।

भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद

पुलिस ने मौके से एक लैपटॉप, 11 मोबाइल फोन, 7 फर्जी सिम कार्ड, हिसाब-किताब से जुड़ी डायरी और बैंक खातों की जानकारी वाले दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग बैंक खातों और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लेनदेन करते थे ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों द्वारा बैंक म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले हैं। ऐसे खातों का उपयोग आमतौर पर साइबर ठगी के पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है।

युवाओं को बनाते थे निशाना

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर खासतौर पर युवाओं को टारगेट करते थे। उन्हें जल्दी पैसा कमाने और गेम जीतकर बड़ा मुनाफा होने का लालच दिया जाता था। इसके बाद धीरे-धीरे उनसे पैसे जमा करवाए जाते और फिर संपर्क तोड़ दिया जाता था।

पुलिस का मानना है कि यह कोई छोटा नेटवर्क नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा साइबर ठगी गिरोह हो सकता है। इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी आशंका जताई जा रही है।

नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश

फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है और ठगी की रकम कितनी है।

पुलिस साइबर विशेषज्ञों की मदद से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंकिंग दस्तावेजों की जांच कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Web Desk Web Desk The Khatak