राजस्थान में होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को बड़ा झटका! अब बिना इस नए नियम के नहीं चलेगा काम, फीस बढ़ोतरी ने बढ़ाई टेंशन

राजस्थान सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और जिम समेत 18 श्रेणियों के कारोबारों के लिए नया लाइसेंस सिस्टम लागू कर दिया है।

May 26, 2026 - 07:36
राजस्थान में होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को बड़ा झटका! अब बिना इस नए नियम के नहीं चलेगा काम, फीस बढ़ोतरी ने बढ़ाई टेंशन

राजस्थान में होटल, रेस्टोरेंट और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े कारोबारियों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। स्वायत्त शासन विभाग ने शहरी निकायों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, मिठाई की दुकान, जिम, ब्यूटी पार्लर और मोबाइल फूड वैन समेत 18 श्रेणियों के प्रतिष्ठानों की वार्षिक लाइसेंस फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत कई श्रेणियों में फीस 2 से 5 गुना तक बढ़ाई गई है।

सरकार ने इसके साथ ही 9 साल पुराने नियमों में बड़ा नीतिगत बदलाव भी किया है। वर्ष 2017 से लागू होटल स्टार रेटिंग आधारित लाइसेंस सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अब होटल की लाइसेंस फीस उसकी स्टार कैटेगरी से नहीं, बल्कि कमरों की संख्या और उपलब्ध लग्जरी सुविधाओं के आधार पर तय होगी।

अब स्टार रेटिंग नहीं, कमरों और सुविधाओं पर तय होगी फीस

नई व्यवस्था के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में यदि किसी होटल में 50 से 100 कमरे हैं तो उसे 50 हजार रुपए वार्षिक लाइसेंस फीस देनी होगी। वहीं यदि होटल में स्विमिंग पूल, जिम और स्पा जैसी लग्जरी सुविधाएं उपलब्ध हैं तो फीस बढ़कर 75 हजार रुपए तक पहुंच जाएगी।

इसके अलावा 101 से 150 कमरों वाले लग्जरी होटल को 1 लाख रुपए और 150 से अधिक कमरों वाले होटल को 1.50 लाख रुपए वार्षिक फीस देनी होगी। सरकार का कहना है कि नई नीति से बड़े और प्रीमियम प्रतिष्ठानों को अलग श्रेणी में लाया जाएगा और लाइसेंस व्यवस्था अधिक व्यवस्थित बनेगी।

होटल और रेस्टोरेंट संचालकों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव

नई फीस संरचना के बाद छोटे और मध्यम स्तर के होटल तथा रेस्टोरेंट संचालकों में नाराजगी देखी जा रही है। पहले 10 कमरों तक के होटल के लिए 5 हजार रुपए वार्षिक फीस देनी पड़ती थी, लेकिन अब 50 कमरों तक के होटल के लिए सीधे 25 हजार रुपए शुल्क निर्धारित कर दिया गया है।

इसी तरह 50 चेयर तक के एसी रेस्टोरेंट की फीस 5 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए कर दी गई है। नॉन-एसी रेस्टोरेंट की फीस भी 2500 रुपए से बढ़ाकर 7500 रुपए कर दी गई है।

जिम, स्विमिंग पूल और मोबाइल फूड वैन जैसी श्रेणियों में भी फीस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। कारोबारियों का कहना है कि पहले से बढ़ती बिजली दरें, टैक्स और संचालन लागत के बीच यह फैसला व्यापार पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला साबित होगा।

होटल संचालकों ने जताई नाराजगी

होटल और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों ने इस फैसले को राज्य की पर्यटन नीति के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि सरकार एक ओर पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने की बात करती है, जबकि दूसरी ओर लाइसेंस फीस में अचानक कई गुना बढ़ोतरी कर कारोबारियों पर दबाव बढ़ाया जा रहा है।

व्यापारियों के अनुसार इससे नए निवेश प्रभावित हो सकते हैं और रोजगार के अवसरों पर भी असर पड़ सकता है। खासतौर पर छोटे होटल और पारिवारिक रेस्टोरेंट संचालकों के लिए नई फीस व्यवस्था आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई

नई गाइडलाइन में केवल फीस ही नहीं बढ़ाई गई है, बल्कि नियमों को भी काफी सख्त बनाया गया है। बिना वैध लाइसेंस या नवीनीकरण के संचालित प्रतिष्ठानों पर सीधी सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने पर 5 हजार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे अवैध रूप से चल रहे प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण किया जा सकेगा और शहरी क्षेत्रों में व्यवसायिक गतिविधियों को नियमन के दायरे में लाया जाएगा।

स्वास्थ्य अधिकारी और ईओ को मिली जिम्मेदारी

जिन नगरीय निकायों में स्वास्थ्य अधिकारी (एमबीबीएस) कार्यरत हैं, वहां वरिष्ठतम स्वास्थ्य अधिकारी को लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण का अधिकार दिया गया है। वहीं जिन निकायों में स्वास्थ्य अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, वहां आयुक्त, जोन उपायुक्त या अधिशाषी अधिकारी यह जिम्मेदारी संभालेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे लाइसेंस प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित होगी। हालांकि कारोबारियों को उम्मीद है कि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करेगी और छोटे व्यवसायों को राहत देने के लिए संशोधन कर सकती है।

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