स्मार्ट मीटर की ‘अति स्मार्ट’ हरकत: बंद मकान का बिल 1 लाख 26 हजार, उपभोक्ता हैरान
बंद मकान में स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता को 1,26,296 रुपये का बिजली बिल मिला, जिसमें 14,422 यूनिट खपत दर्शाई गई। तकनीकी खराबी की शिकायत के बीच स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल उठ रहे हैं।

राजस्थान के जोबनेर कस्बे में विद्युत वितरण निगम द्वारा पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने की योजना उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। ताजा मामला सराय मोहल्ला निवासी अमीरुद्दीन रंगरेज का है, जिनके बंद पड़े मकान का एक महीने का बिजली बिल 1,26,296 रुपये आया है। इस बिल ने न केवल अमीरुद्दीन को झटका दिया, बल्कि स्मार्ट मीटर लगवाने वाले अन्य उपभोक्ताओं की भी चिंता बढ़ा दी है।
बंद मकान में 14,422 यूनिट की खपत!
जानकारी के अनुसार, अमीरुद्दीन का परिवार लंबे समय से जयपुर में रह रहा है और उनका जोबनेर स्थित मकान छह महीने से बंद पड़ा है। पिछले छह महीनों की मीटर रीडिंग शून्य थी, और वे हर महीने औसतन 153 रुपये का बिल जमा करवा रहे थे। हाल ही में उनके घर पुराना मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाया गया। लेकिन जब पहला बिल आया, तो उसमें 14,422 यूनिट की खपत दर्शाई गई, जिसके आधार पर 1,26,296 रुपये का बिल थमा दिया गया। अमीरुद्दीन ने हैरानी जताते हुए कहा, “जिस घर में एक बल्ब भी नहीं जल रहा, वहां इतना बिल कैसे आ सकता है? स्मार्ट मीटर की टिमटिमाती लाइट का बिल ही लाखों में आ रहा है, तो उपयोग का बिल कितना होगा?”
विद्युत निगम का जवाब: तकनीकी खराबी
अमीरुद्दीन ने तुरंत विद्युत निगम के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। इस पर कनिष्ठ अभियंता हरलाल बूरी ने बताया कि यह तकनीकी खराबी के कारण हो सकता है और समस्या के समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इस जवाब से उपभोक्ता संतुष्ट नहीं हैं। अमीरुद्दीन ने कहा, “यह स्मार्ट मीटर लोगों की नींद हराम कर देगा। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए।”
स्मार्ट मीटर योजना पर सवाल
राजस्थान सरकार ने 14,000 करोड़ रुपये की लागत से 1.43 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी, जिसके तहत अब तक 14 लाख मीटर लगाए जाने चाहिए थे। लेकिन अभी तक केवल 2.87 लाख मीटर ही लग पाए हैं। इस देरी के कारण केंद्र सरकार की सब्सिडी भी अटकने की आशंका है। डिस्कॉम प्रबंधन ने अनुबंधित कंपनी को नirono, चेतावनी देते हुए कहा है कि तीन महीने में सुधार न हुआ तो टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा।
उपभोक्ताओं में बढ़ता असंतोष
जोबनेर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में स्मार्ट मीटरों से बिल बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि पहले जहां 1,500-2,000 रुपये का बिल आता था, वहां अब 10,000 रुपये तक के बिल आने लगे हैं। बाड़मेर और सिरमौर जैसे क्षेत्रों में भी स्मार्ट मीटर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की खबरें हैं। उपभोक्ता इसे बिजली कंपनियों की लापरवाही और तकनीकी खामियों का नतीजा मान रहे हैं।
इस घटना ने स्मार्ट मीटर की विश्वसनीयता पर सवाल उठा दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच और पारदर्शी बिलिंग प्रक्रिया सुनिश्चित करने की जरूरत है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि सरकार और बिजली कंपनियां इस मामले में तुरंत कार्रवाई करें, ताकि जनता का भरोसा बहाल हो सके।