बाड़मेर से चलने वाली दो ट्रेनों में बड़ा बदलाव: शालीमार एलएचबी रैक और यशवंतपुर एक्सप्रेस अब इलेक्ट्रिक इंजन से दौड़ेगी

उत्तर पश्चिम रेलवे ने बाड़मेर से चलने वाली शालीमार एक्सप्रेस को एलएचबी रैक और यशवंतपुर एक्सप्रेस को इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित करने का बड़ा बदलाव किया, जिससे यात्रा आरामदायक, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनेगी।

Nov 10, 2025 - 10:44
बाड़मेर से चलने वाली दो ट्रेनों में बड़ा बदलाव: शालीमार एलएचबी रैक और यशवंतपुर एक्सप्रेस अब इलेक्ट्रिक इंजन से दौड़ेगी

उत्तर पश्चिम रेलवे ने बाड़मेर रेलवे स्टेशन से संचालित होने वाली दो महत्वपूर्ण ट्रेनों में एक बड़ा तकनीकी परिवर्तन किया है। इस बदलाव के तहत, शालीमार एक्सप्रेस को पूरी तरह से एलएचबी (लिंक्ड हॉरिजॉन्टल बोगी) रैक से लैस किया जाएगा, जबकि यशवंतपुर एक्सप्रेस को इलेक्ट्रिक इंजन से चलाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कदम यात्रियों के सफर को न केवल अधिक आरामदायक और सुगम बनाएगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी साबित होगा। इस परिवर्तन से ईंधन की खपत में कमी आएगी और प्रदूषण स्तर को कम करने में मदद मिलेगी।

परिवर्तन का विवरण;  उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के तहत बाड़मेर स्टेशन से रोजाना चलने वाली इन दो ट्रेनों में लंबे समय से मांग उठ रही थी कि इन्हें आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जाए। रेलवे ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से ये बदलाव लागू कर दिए हैं।

शालीमार एक्सप्रेस: इस ट्रेन को अब एलएचबी रैक से संचालित किया जाएगा। एलएचबी कोच पारंपरिक आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्टरी) कोच की तुलना में अधिक मजबूत, सुरक्षित और आरामदायक होते हैं। इनमें बेहतर सस्पेंशन सिस्टम, एंटी-क्लाइंबिंग फीचर और आधुनिक इंटीरियर सुविधाएं जैसे एयर कंडीशनिंग, बेहतर सीटिंग अरेंजमेंट और बायो-टॉयलेट शामिल हैं। इससे यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में कम थकान और अधिक सुरक्षा का अनुभव होगा। 

यशवंतपुर एक्सप्रेस : इस ट्रेन को अब डीजल इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक इंजन से चलाया जाएगा। इलेक्ट्रिक इंजन न केवल गति और दक्षता में बेहतर होते हैं, बल्कि डीजल के मुकाबले कम उत्सर्जन करते हैं। इससे ट्रेन की औसत गति में वृद्धि होगी, जिससे यात्रा समय में कुछ कमी आ सकती है।

ये बदलाव बाड़मेर जिले के यात्रियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि बाड़मेर राजस्थान का एक सीमावर्ती जिला है जहां रेल कनेक्टिविटी सीमित है। इन ट्रेनों से हजारों यात्री प्रतिमाह दिल्ली, कोलकाता (शालीमार) और बैंगलोर (यशवंतपुर) जैसे प्रमुख शहरों की ओर जाते हैं।

बदलाव के पीछे के कारण और लाभ;  रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "यह परिवर्तन रेलवे के 'अमृत भारत' और 'परिवर्तन' योजनाओं के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य भारतीय रेल को 2030 तक पूरी तरह विद्युतीकृत और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है। डीजल इंजनों से इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट करने से प्रति किलोमीटर ईंधन बचत के साथ-साथ कार्बन एमिशन में 70% तक की कमी आएगी।" यात्रियों के लिए प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:आराम और सुरक्षा: एलएचबी रैक में कम कंपन और शोर होने से लंबी यात्रा थकान भरी नहीं लगेगी। इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों में बेहतर सुरक्षा फीचर्स उपलब्ध होंगे। ,समय की बचत: इलेक्ट्रिक इंजन की उच्च दक्षता से ट्रेनें निर्धारित समय पर पहुंचेंगी, जिससे कनेक्टिंग ट्रेनों के लिए इंतजार कम होगा। ,पर्यावरण संरक्षण: डीजल के उपयोग में कमी से वायु प्रदूषण कम होगा, जो बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी क्षेत्र के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जहां धूल और प्रदूषण पहले से ही स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा करते हैं। ,आर्थिक लाभ: कम रखरखाव लागत के कारण टिकट मूल्य में संभावित कमी या सुविधाओं में वृद्धि हो सकती है।

यात्रियों की प्रतिक्रिया और भविष्य की योजनाएं;  स्थानीय यात्रियों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। बाड़मेर के एक व्यापारी ने कहा, "पहले ट्रेनों में पुराने कोचों के कारण सफर असुविधाजनक होता था। अब इलेक्ट्रिक इंजन से यात्रा तेज और साफ-सुथरी होगी।" वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसे "हरित रेल क्रांति" का हिस्सा बताया है।उत्तर पश्चिम रेलवे ने आश्वासन दिया है कि यह बदलाव अन्य ट्रेनों पर भी जल्द लागू किया जाएगा। जोधपुर-बाड़मेर रूट पर विद्युतीकरण कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे आने वाले महीनों में और अधिक ट्रेनें इलेक्ट्रिक मोड में शिफ्ट हो सकेंगी। यात्रियों से अपील की गई है कि वे रेलवे की आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से नवीनतम अपडेट चेक करें, क्योंकि शेड्यूल में मामूली बदलाव संभव हैं।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.