लड़का बनकर क्रिकेट सीखने वाली शेफाली वर्मा बनीं महिला वर्ल्ड कप की स्टार
शेफाली वर्मा ने 2025 महिला टी20 विश्व कप फाइनल में 68 रनों की विस्फोटक पारी और 2 विकेट लेकर भारत को पहला खिताब दिलाया। 21 साल की उम्र में विश्व कप फाइनल में अर्धशतक बनाने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनीं। रोहतक में लड़का बनकर क्रिकेट अकादमी में दाखिला लेकर शुरू हुई उनकी प्रेरणादायक यात्रा अब लाखों लड़कियों के लिए मिसाल है।
03 नवंबर 2025: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा सनसनी शेफाली वर्मा ने 2025 महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में अपने हरफनमौला प्रदर्शन से न केवल भारत को खिताब दिलाया, बल्कि खुद को क्रिकेट जगत की नई स्टार साबित कर दिया। फाइनल मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी और उपयोगी गेंदबाजी ने टीम इंडिया की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' का खिताब भी मिला। लेकिन शेफाली की यह सफलता सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है; उनकी प्रे
रणादायक जीवन यात्रा – जहां उन्होंने लड़का बनकर क्रिकेट सीखा – ने लाखों युवाओं, खासकर लड़कियों को सपनों को हकीकत बनाने की ताकत दी है।
फाइनल में चमकी शेफाली की हरफनमौला प्रतिभा; 2025 महिला टी20 विश्व कप का फाइनल मुकाबला दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 168 रन बनाए। इस स्कोर में शेफाली वर्मा का योगदान सबसे बड़ा रहा। ओपनिंग करने उतरीं शेफाली ने महज 35 गेंदों पर 68 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 8 चौके और 4 छक्के शामिल थे। उनकी आक्रामक शुरुआत ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को बैकफुट पर धकेल दिया और भारत को मजबूत नींव प्रदान की।गेंदबाजी में भी शेफाली ने कमाल दिखाया। उन्होंने अपने 4 ओवरों में मात्र 22 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की कप्तान एलिसा हीली का विकेट भी शामिल था। भारत ने मैच 18 रनों से जीतकर पहली बार महिला टी20 विश्व कप पर कब्जा जमाया। मैच के बाद शेफाली ने कहा, "यह सपना सच होने जैसा है। टीम के लिए योगदान देना और देश को खिताब दिलाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा पल है।"
कम उम्र में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान; शेफाली वर्मा का क्रिकेट सफर बेहद कम उम्र से शुरू हुआ। हरियाणा के रोहतक में जन्मीं शेफाली ने मात्र 15 वर्ष की आयु में सितंबर 2019 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया। वह टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बनीं। उनके डेब्यू मैच में ही दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 46 रनों की पारी ने सबका ध्यान खींचा।2025 विश्व कप फाइनल तक आते-आते शेफाली महज 21 साल की हो चुकी थीं, लेकिन उन्होंने विश्व कप फाइनल में अर्धशतक ठोककर एक नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह महिला विश्व कप फाइनल में 50 या इससे अधिक रन बनाने वाली सबसे कम उम्र की बल्लेबाज बन गईं। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की बेथ मूनी के नाम था, जिन्होंने 22 साल की उम्र में यह कारनामा किया था। पूरे टूर्नामेंट में शेफाली ने 7 मैचों में 285 रन बनाए और 8 विकेट लिए, जिससे वह प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की दौड़ में भी शामिल रहीं।
प्रेरणादायक कहानी: लड़का बनकर अकादमी में एंट्री शेफाली की सफलता की जड़ें उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति में छिपी हैं। रोहतक में लड़कियों के लिए कोई क्रिकेट अकादमी नहीं थी। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति जुनूनी शेफाली को देखकर उनके पिता हरविंदर सिंह ने एक अनोखा फैसला लिया। उन्होंने शेफाली के बाल छोटे करवाए, लड़कों जैसे कपड़े पहनाए और उन्हें एक लोकल बॉयज क्रिकेट अकादमी में 'शेफाली' की जगह 'विकास' नाम से दाखिला दिलवाया।पिता हरविंदर याद करते हैं, "लड़कियों को मौका नहीं मिलता था। मैंने सोचा, अगर बेटी में इतना जुनून है तो रास्ता बनाना पड़ेगा। शुरू में कोच को पता चला तो हैरान हुए, लेकिन शेफाली की प्रतिभा देखकर उन्होंने समर्थन किया।" यह छलावा ज्यादा दिन नहीं चला, लेकिन इसने शेफाली को बुनियादी ट्रेनिंग दी। बाद में हरियाणा महिला टीम में चयन के बाद उनकी असली पहचान सामने आई। यह कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर शेफाली की तारीफ की: "शेफाली वर्मा की कहानी साबित करती है कि जुनून सीमाओं को तोड़ता है। बेटियां आगे बढ़ेंगी तो देश आगे बढ़ेगा।
विस्फोटक बल्लेबाजी की मिसाल; शेफाली को 'महिला क्रिकेट की विराट कोहली' कहा जाता है। उनकी आक्रामक ओपनिंग स्टाइल, बड़े शॉट्स और पावर-हिटिंग ने महिला क्रिकेट को नई ऊंचाई दी है। टी20 फॉर्मेट में उनका स्ट्राइक रेट 140 से ऊपर रहा है। अंतरराष्ट्रीय करियर में अब तक उन्होंने 50+ टी20 मैचों में 1500 से अधिक रन बनाए हैं, जिसमें कई अर्धशतक शामिल हैं। गेंदबाजी में भी ऑफ-स्पिनर के तौर पर वह उपयोगी साबित होती हैं।क्रिकेट विशेषज्ञ सुनील गावस्कर ने कहा, "शेफाली ने महिला क्रिकेट में पुरुषों जैसी आक्रामकता लाई है। उनकी कहानी लड़कियों को प्रेरित करेगी कि बाधाएं कोई मायने नहीं रखतीं।"