रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार, मजबूत साझेदारी को नई ऊंचाई देने का मौका

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार भारत आएंगे। 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगे। रूसी तेल की लॉन्ग-टर्म डील, S-400 की शेष डिलीवरी और ईएईयू के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर अहम बातचीत होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्टेट डिनर की मेजबानी करेंगी।

Nov 28, 2025 - 16:36
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार, मजबूत साझेदारी को नई ऊंचाई देने का मौका

नई दिल्ली/मॉस्को: रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण 2022 से ठप पड़ी द्विपक्षीय यात्राओं को फिर से गति मिलने वाली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत का दौरा करेंगे। यह उनके तीन साल के लंबे अंतराल के बाद भारत की धरती पर पहली यात्रा होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। खास तौर पर, रूसी क्रूड ऑयल की खरीद, एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी और मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) पर बातचीत का केंद्र बिंदु रहेगा। यह यात्रा भारत-रूस संबंधों को युद्ध की छाया से उबारने और वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

यात्रा का पृष्ठभूमि और महत्व रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए यह यात्रा बेहद अहम है। सोवियत संघ के समय से चली आ रही यह साझेदारी आज भी रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में मजबूत बनी हुई है। हालांकि, फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद पुतिन की कोई विदेश यात्रा नहीं हुई थी, खासकर भारत जैसे प्रमुख साझेदार देशों में। पिछले तीन वर्षों में दोनों देशों के नेता वर्चुअल माध्यमों से संपर्क में रहे, लेकिन आमने-सामने की मुलाकात का अभाव महसूस हो रहा था।विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह यात्रा भारत की ओर से प्रस्तावित थी, जो रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती निर्भरता को ध्यान में रखते हुए की गई। यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है, और भारत ने रूसी तेल को सस्ते दामों पर खरीदकर अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा है। 2024-25 में भारत रूस से लगभग 40% क्रूड ऑयल आयात करने वाला सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है। इसी क्रम में यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।

23वीं भारत-रूस शिखर सम्मेलन: मुख्य आकर्षण पुतिन का यह दौरा 23वीं भारत-रूस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन (India-Russia Annual Summit) के इर्द-गिर्द घूमेगा। यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच सालाना आयोजित होने वाली उच्च स्तरीय बैठक है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और सांस्कृतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श होता है। परंपरागत रूप से, मेजबान देश बदल-बदलकर होता है—एक साल भारत, अगला रूस। 2022 के बाद यह पहली बार है जब सम्मेलन आमने-सामने हो रहा है।सम्मेलन के दौरान पुतिन का स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। दोनों नेताओं के बीच एक-से-एक द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें वैश्विक शांति, बहुपक्षीयता और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा संभव है। सम्मेलन का थीम 'विश्वास, प्रतिबद्धता और एकजुटता' रखा गया है, जो वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों की रणनीति को दर्शाता है।

प्रमुख चर्चा के मुद्दे: तेल, रक्षा और व्यापार यात्रा का सबसे बड़ा फोकस आर्थिक और रक्षा सहयोग पर रहेगा। यहां कुछ प्रमुख बिंदु हैं:क्रूड ऑयल डील: रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल के दाम गिरने से भारत को फायदा हुआ, और अब दोनों देश लंबी अवधि की डील पर विचार कर रहे हैं। चर्चा में 2026 तक तेल आयात को दोगुना करने और रुपया-रूबल व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रहेगा। 

एस-400 मिसाइल सिस्टम: भारत ने 2018 में रूस के साथ 5.43 अरब डॉलर की डील पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत पांच एस-400 स्क्वाड्रन की आपूर्ति होनी है। पहली खेप 2021 में पहुंच चुकी है, लेकिन युद्ध के कारण बाकी डिलीवरी में देरी हुई। इस यात्रा में डिलीवरी शेड्यूल को तेज करने और अतिरिक्त मिसाइल सिस्टम खरीद पर बात हो सकती है। एस-400 भारत की वायु रक्षा को अभूतपूर्व मजबूती देगा, खासकर चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के संदर्भ में।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA): भारत और रूस ईएईयू (यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में हैं। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। चर्चा में कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी उत्पादों पर छूट पर फोकस होगा। इसके अलावा, दोनों नेता ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर भी विचार करेंगे।

राजकीय स्वागात और सांस्कृतिक आयोजन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुतिन के सम्मेलन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में एक भव्य स्टेट डिनर आयोजित करेंगी। यह डिनर भारतीय परंपराओं और रूसी संस्कृति के मिश्रण से सजा होगा, जिसमें पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक प्रदर्शन शामिल होंगे। पुतिन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा, और वे राजकीय समारोहों में शरीक होंगे।इसके अतिरिक्त, यात्रा के दौरान सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी जोर दिया जाएगा। रूसी कलाकारों का एक दल भारतीय दर्शकों के सामने प्रदर्शन करेगा, जबकि भारतीय योग और आयुर्वेद पर आधारित सेमिनार मॉस्को में आयोजित होंगे। यह यात्रा न केवल राजनयिक स्तर पर, बल्कि जन-जन स्तर पर भी संबंधों को मजबूत करेगी।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.