राजस्थान में ईद-ए-मिलादुन्नबी पर मुस्लिम समुदाय ने CM भजनलाल शर्मा से शराबबंदी की मांग.

राजस्थान में मुस्लिम समुदाय ने ईद-ए-मिलादुन्नबी 2025 पर शराब बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की है। यह मांग मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन सौंपकर की गई, जिसमें कहा गया कि यह पर्व पैगंबर मुहम्मद साहब का जन्मदिन है और शराब की बिक्री धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है। सरकार के पर्युषण और अनंत चतुर्दशी पर मांस बिक्री पर रोक के फैसले से प्रेरित इस मांग को जलसा समिति और अन्य संगठनों ने उठाया है, ताकि सामाजिक सौहार्द और धार्मिक माहौल बना रहे।

Aug 29, 2025 - 18:20
राजस्थान में ईद-ए-मिलादुन्नबी पर मुस्लिम समुदाय ने CM भजनलाल शर्मा से शराबबंदी की मांग.

जयपुर: राजस्थान में धार्मिक त्योहारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को सराहते हुए मुस्लिम समुदाय ने ईद-ए-मिलादुन्नबी के अवसर पर शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इस पवित्र पर्व को पैगंबर मुहम्मद साहब के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जिसे मुस्लिम समुदाय अपना सबसे महत्वपूर्ण त्योहार मानता है। समुदाय का कहना है कि इस दिन शराब की बिक्री न केवल उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित कर सकती है। इस मांग को लेकर मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है।

सरकार के हालिया फैसलों से मिली प्रेरणा

हाल ही में राजस्थान सरकार ने जैन समुदाय के पर्युषण पर्व (28 अगस्त) और हिंदू समुदाय के अनंत चतुर्दशी पर्व (6 सितंबर) के दौरान मांस, मटन और अंडे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था। इस कदम की विभिन्न समुदायों ने सराहना की थी, क्योंकि यह धार्मिक भावनाओं के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। इस फैसले से प्रेरित होकर मुस्लिम समुदाय ने मांग की है कि ईद-ए-मिलादुन्नबी पर भी उसी तरह की संवेदनशीलता दिखाई जाए। समुदाय का तर्क है कि जब अन्य धर्मों के त्योहारों पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए जा सकते हैं, तो इस्लाम के इस महत्वपूर्ण पर्व पर भी शराब की बिक्री पर रोक लगनी चाहिए।

 ईदमिलादुन्नबी जलसा समिति के अध्यक्ष उस्ताद हाजी हमीम बख्श ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि 5 या 6 सितंबर 2025 को मनाए जाने वाले ईद-ए-मिलादुन्नबी के दिन पूरे राजस्थान में शराब की बिक्री और ठेके पूरी तरह बंद रखे जाएं। समुदाय का कहना है कि इस दिन धार्मिक जुलूस, सभाएं और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें भाईचारे, शांति और इंसानियत का संदेश दिया जाता है। ऐसे में शराब की उपलब्धता न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है, बल्कि सामाजिक माहौल को भी खराब कर सकती है।

मुस्लिम समुदाय का तर्क

मुस्लिम समुदाय ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि ईद-ए-मिलादुन्नबी इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने, रबी-उल-अव्वल की 12वीं तारीख को मनाया जाता है। यह दिन पैगंबर मुहम्मद साहब के जन्म और उनकी शिक्षाओं को याद करने का अवसर होता है। समुदाय का मानना है कि शराब की बिक्री इस पवित्र दिन के माहौल को बिगाड़ सकती है और धार्मिक आयोजनों में व्यवधान पैदा कर सकती है। इसके अलावा, शराबबंदी से सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलेगा और समाज में एकता का संदेश जाएगा।

कई संगठनों ने उठाई आवाज

इस मांग को केवल ईदमिलादुन्नबी जलसा समिति तक सीमित नहीं रखा गया है। राशिद खान अब्बासी, इरफान बेली और कई अन्य सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इन संगठनों का कहना है कि शराबबंदी का फैसला न केवल मुस्लिम समुदाय की भावनाओं का सम्मान करेगा, बल्कि यह सरकार की निष्पक्षता और सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण को भी दर्शाएगा।

आगे क्या?

मुस्लिम समुदाय की इस मांग पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह मांग राजस्थान में धार्मिक और सामाजिक सौहार्द के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। समुदाय को उम्मीद है कि सरकार उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी।

मुस्लिम समुदाय की यह मांग राजस्थान सरकार के समक्ष एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभरी है। यह न केवल धार्मिक संवेदनशीलता का सवाल है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और एकता को मजबूत करने का भी अवसर है।