परिवार की रोकटोक से तंग आकर प्रेमियों के साथ नाबालिग सहेलियों का भागने का प्लान,RPF ने ट्रेन से उतारा
दो नाबालिग सहेलियां परिवार की रोकटोक से तंग आकर प्रेमियों के साथ मुंबई भागने की कोशिश में थीं, लेकिन खंडवा RPF ने उन्हें ट्रेन से उतारकर परिजनों को सौंप दिया। काउंसलिंग में खुलासा हुआ कि वे घरेलू विवादों से परेशान थीं।

बिहार के नालंदा जिले की दो नाबालिग सहेलियां, उम्र 15 और 16 साल, अपने प्रेमियों के साथ मुंबई में नई जिंदगी शुरू करने का सपना देख रही थीं। लेकिन उनका यह सपना खंडवा रेलवे स्टेशन पर उस वक्त टूट गया, जब रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) ने उन्हें जनता एक्सप्रेस ट्रेन से उतार लिया। दोनों सहेलियां अपने परिवार की लगातार टोकाटाकी और घरेलू विवादों से परेशान थीं।
प्रेमियों से फोन पर घंटों बात करती थीं
नालंदा के एक गांव में रहने वाली ये दोनों सहेलियां एक ही स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ती हैं। उनके प्रेमी भी उसी मोहल्ले के हैं और दोनों नाबालिग हैं। दोनों लड़कियां अक्सर अपने प्रेमियों से फोन पर घंटों बात करती थीं, जिसे लेकर परिवार वाले नाराज रहते थे। घर में आए दिन होने वाले झगड़ों से तंग आकर दोनों ने मुंबई जाकर प्रेमियों के साथ शादी करने और वहां बसने का फैसला किया।
लड़कियों ने अपने प्रेमियों से कहा कि पहले वे मुंबई जाएं और वहां रहने की व्यवस्था करें। प्रेमियों ने करीब 10 दिन पहले मुंबई जाकर किराए का मकान ढूंढ लिया और अपने एक दोस्त की मदद से रहने की पूरी तैयारी कर ली। इसके बाद उन्होंने लड़कियों को मुंबई आने के लिए कहा।
छात्रवृत्ति के पैसों से खरीदा मोबाइल, ट्रेस से पकड़ी गईं
23 अगस्त को दोनों सहेलियां जनता एक्सप्रेस में सवार होकर मुंबई के लिए निकल पड़ीं। उनके पास मोबाइल फोन थे, जो उन्होंने छात्रवृत्ति योजना के पैसों से खरीदे थे। जब परिजनों को उनके भागने की खबर मिली, तो उन्होंने तुरंत नालंदा पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन ट्रेस की और खंडवा RPF को अलर्ट किया। 24 अगस्त की रात 11:30 बजे RPF ने दोनों लड़कियों को खंडवा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतार लिया।
परिवार की परेशानियां और काउंसलिंग
खंडवा बाल कल्याण समिति ने लड़कियों की काउंसलिंग की, जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। एक लड़की अपने दादा-दादी के साथ रहती थी और उनकी सख्ती से परेशान थी। दूसरी लड़की अपने माता-पिता और भाई के व्यवहार से तंग थी। एक लड़की के पिता दिल्ली में मिट्टी के बर्तन बनाते हैं, जबकि दूसरी के पिता अहमदाबाद की फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं।
समिति के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने बताया कि दोनों लड़कियां परिवार के दबाव से इतनी त्रस्त थीं कि उन्होंने घर छोड़कर मुंबई में नई जिंदगी शुरू करने का फैसला कर लिया। हालांकि, काउंसलिंग के दौरान दोनों को समझाया गया कि उनकी उम्र अभी ऐसी नहीं है कि वे इतने बड़े फैसले ले सकें।
27 घंटे का सफर, परिजनों का दर्द
लड़कियों के परिजनों को खंडवा RPF ने सूचना दी। परिजन स्थानीय पुलिस के साथ टैक्सी से 1400 किलोमीटर का सफर तय कर मंगलवार दोपहर खंडवा पहुंचे। इस दौरान एक लड़की ने अपने भाई के साथ जाने से इनकार कर दिया। उसे डर था कि रास्ते में फिर से कोई विवाद हो सकता है। बाल कल्याण समिति ने दोनों भाई-बहन को समझाइश दी और उन्हें सुरक्षित घर भेज दिया।