होर्मुज के बाद अब दूसरे अहम समुद्री रास्ते पर ईरान की नजर, US-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी दुनिया की चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट ही नहीं, बल्कि बाब अल-मंडेब समुद्री रास्ते पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

May 19, 2026 - 17:45
होर्मुज के बाद अब दूसरे अहम समुद्री रास्ते पर ईरान की नजर, US-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी दुनिया की चिंता

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और समुद्री सुरक्षा पर भी दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों—होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट—पर संकट गहराता नजर आ रहा है।

ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान और उसके सहयोगी ऐसे हालात बनाने की तैयारी में हैं, जिससे तेल सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भारी असर पड़ सकता है। इससे दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने, सप्लाई बाधित होने और आर्थिक अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।

होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंडेब पर भी खतरा

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के विश्लेषण में दावा किया गया है कि ईरान तेज और हाई-इंटेंसिटी युद्ध रणनीति पर काम कर रहा है। इसमें खाड़ी क्षेत्र के तेल ठिकानों, रिफाइनरियों और बड़े बंदरगाहों को निशाना बनाया जा सकता है।

इसके साथ ही यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को बंद या बाधित करने की आशंका ने वैश्विक चिंता को और बढ़ा दिया है। यह समुद्री रास्ता लाल सागर को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार इसी रूट से गुजरता है।

अगर होर्मुज और बाब अल-मंडेब दोनों पर संकट गहराता है, तो दुनिया की तेल सप्लाई पर डबल असर पड़ सकता है। इससे एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

ईरान का आरोप- अमेरिका कूटनीति में बाधा

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के रवैये पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का दबाव और धमकी भरा व्यवहार बातचीत और कूटनीति के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बन रहा है।

अराघची ने कहा कि तेहरान बातचीत से पीछे नहीं हट रहा, लेकिन दबाव में झुकने के लिए भी तैयार नहीं है। ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय हितों को लेकर सख्त रुख दिखा रहा है।

ट्रंप ने फिलहाल टाला हमला

दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को कुछ समय के लिए टाल दिया है।

ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत कई खाड़ी देशों ने उनसे कुछ दिनों का समय देने की अपील की थी, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि बातचीत के जरिए समझौते की संभावना अभी बाकी है।

ट्रंप ने कहा,
“हम ईरान पर बड़ा हमला करने की तैयारी में थे, लेकिन फिलहाल इसे रोक दिया गया है। उम्मीद है कि शायद हमेशा के लिए टल जाए, क्योंकि बातचीत जारी है।”

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर तेहरान ने सीजफायर और परमाणु समझौते से जुड़ी शर्तें नहीं मानीं, तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला है।

वैश्विक बाजार पर दिखने लगा असर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर समुद्री रास्तों पर संकट बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग है, जबकि बाब अल-मंडेब यूरोप और एशिया के बीच शिपिंग का अहम रास्ता माना जाता है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों में अस्थिरता वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

दुनिया की नजरें अब मिडिल ईस्ट पर

फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत पर टिकी हैं। एक तरफ खाड़ी देश तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य तैयारियां भी जारी हैं।

अगर आने वाले दिनों में बातचीत सफल नहीं होती, तो मिडिल ईस्ट में हालात और ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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