राहुल गांधी का वार: ‘कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम’ सवालों से भागते दिखे, जब छिपाने को कुछ नहीं तो डर क्यों?

नॉर्वे दौरे के दौरान पीएम मोदी द्वारा प्रेस सवाल न लेने पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर आलोचना की है। उन्होंने इसे भारत की वैश्विक छवि से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, एक विदेशी पत्रकार के सवाल और बाद में हुई बहस ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है।

May 19, 2026 - 16:48
राहुल गांधी का वार: ‘कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम’ सवालों से भागते दिखे, जब छिपाने को कुछ नहीं तो डर क्यों?

नॉर्वे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संयुक्त प्रेस वार्ता में सवाल न लिए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी की आलोचना की है।

राहुल गांधी का बयान

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि जब दुनिया एक “कमजोर और दबाव में दिखने वाले प्रधानमंत्री” को सवालों से बचते हुए देखती है, तो इससे भारत की छवि पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो सवालों से डरने की जरूरत नहीं होती।

राहुल ने यह टिप्पणी नॉर्वे की पत्रकार हेली लिंग की पोस्ट को साझा करते हुए की, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी से सवाल पूछने की कोशिश की थी।

क्या हुआ नॉर्वे में?

सोमवार को नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे के साथ पीएम मोदी की जॉइंट प्रेस मीट हुई थी। इस दौरान मीडिया के सवाल नहीं लिए गए और दोनों नेता कार्यक्रम के बाद चले गए।

इसी दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेली लिंग ने सवाल किया कि पीएम मोदी दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस में सवालों का जवाब क्यों नहीं देते।

पत्रकार ने सोशल मीडिया पर उठाए सवाल

सवाल का जवाब न मिलने के बाद पत्रकार ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया और लिखा कि नॉर्वे प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पहले स्थान पर है जबकि भारत काफी नीचे रैंक करता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत में मानवाधिकार और प्रेस स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल हैं।

भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

इस विवाद के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने पत्रकार को प्रेस ब्रीफिंग में शामिल होने का न्योता दिया। बाद में पत्रकार ने ब्रीफिंग में हिस्सा लिया और भारत पर भरोसे और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल पूछे।

इस दौरान विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिबी जॉर्ज ने भारत की वैश्विक भूमिका, कोविड के दौरान सहायता, वैक्सीन डिप्लोमेसी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के योगदान का जिक्र किया।

हालांकि, बातचीत के दौरान पत्रकार और अधिकारी के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।

अधिकारी और पत्रकार के बीच बहस

पत्रकार ने सीधे जवाब की मांग की, जबकि अधिकारी ने कहा कि जवाब देने का तरीका तय करना उनका अधिकार है। इस दौरान माहौल थोड़ा गरम हो गया।

पत्रकार का बयान

बाद में हेली लिंग ने स्पष्ट किया कि वह पत्रकार हैं और किसी विदेशी सरकार से जुड़ी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल सवाल पूछे थे, जिनके सीधे जवाब नहीं मिले।

उन्होंने यह भी लिखा कि वह राहुल गांधी के साथ इंटरव्यू करने के लिए तैयार हैं, यदि अवसर दिया जाए।

राजनीतिक विवाद तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राहुल गांधी के बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विपक्ष ने इसे प्रेस स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़कर सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं सरकार समर्थकों का कहना है कि भारत की वैश्विक उपलब्धियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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