डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96.14 तक गिरा, पेट्रोल-डीजल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक महंगाई बढ़ने का खतरा
डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 96.14 तक गिर गया है। कच्चे तेल, महंगाई और विदेश यात्रा से जुड़े खर्च बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।
Business News: भारतीय रुपया 15 मई को डॉलर के मुकाबले 50 पैसे टूटकर पहली बार 96.14 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को रुपया 95.64 के ऑल टाइम लो पर बंद हुआ था। लगातार गिरते रुपए ने महंगाई, आयात खर्च और आम लोगों की जेब पर असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मजबूत होते डॉलर इंडेक्स की वजह से रुपए पर लगातार दबाव बना हुआ है। अगर हालात नहीं सुधरे तो रुपया 100 प्रति डॉलर के स्तर तक भी पहुंच सकता है।
रुपया क्यों कमजोर हो रहा है?
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। तेल महंगा होने से भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे रुपए की वैल्यू कमजोर हो रही है।
इसके अलावा अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में डर का माहौल पैदा कर दिया है। निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर खरीद रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर हो रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। बुधवार को ही विदेशी निवेशकों ने 4,700 करोड़ रुपए से ज्यादा के शेयर बेचे। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपए पर दबाव और ज्यादा बढ़ गया।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
रुपया कमजोर होने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
- पेट्रोल-डीजल और गैस महंगी हो सकती है
- मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम बढ़ सकते हैं
- विदेश यात्रा और पढ़ाई का खर्च बढ़ेगा
- आयातित सामान महंगे होने से महंगाई बढ़ सकती है
कुछ सेक्टर को फायदा भी
हालांकि कमजोर रुपए से एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को फायदा मिल सकता है। विदेश से डॉलर में कमाई करने वालों और मेडिकल टूरिज्म सेक्टर को भी लाभ मिलने की संभावना है।
सरकार और RBI की नजर
रुपए में लगातार गिरावट को देखते हुए केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक हालात पर नजर बनाए हुए हैं। सरकार पहले ही विदेशी मुद्रा बचाने और अनावश्यक आयात कम करने के संकेत दे चुकी है।