UAE में फिर बड़ा ड्रोन हमला: बराकाह न्यूक्लियर प्लांट के बाहर लगी आग, खाड़ी में बढ़ा युद्ध का खतरा

अबू धाबी स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहरी इलाके में ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। UAE अधिकारियों ने हमले में ईरानी ड्रोन के इस्तेमाल की आशंका जताई है। हालांकि परमाणु सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन होर्मुज संकट के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है।

May 17, 2026 - 17:12
UAE में फिर बड़ा ड्रोन हमला: बराकाह न्यूक्लियर प्लांट के बाहर लगी आग, खाड़ी में बढ़ा युद्ध का खतरा

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) एक बार फिर बड़े ड्रोन हमले से दहल उठा है। अबू धाबी के अल धफरा क्षेत्र में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहरी इलाके में ड्रोन अटैक के बाद आग लगने से पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मच गया। UAE अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में ईरान से जुड़े ड्रोन का इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ और परमाणु सुरक्षा पर भी कोई असर नहीं पड़ा।

प्लांट के बाहरी हिस्से में लगी आग

अबू धाबी मीडिया ऑफिस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्लांट परिसर की बाहरी सुरक्षा सीमा के पास मौजूद एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर में आग लगी थी। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि यह आग ड्रोन हमले के कारण भड़की। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों और फायर ब्रिगेड की टीमों ने मोर्चा संभाला और कुछ ही समय में आग पर काबू पा लिया गया।

यूएई की फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) ने साफ किया कि बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पूरी तरह सुरक्षित है और प्लांट की सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रही हैं। किसी भी तरह का रेडिएशन रिसाव या न्यूक्लियर सिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचा है।

अरब दुनिया का पहला न्यूक्लियर प्लांट

बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट UAE ही नहीं बल्कि पूरे अरब जगत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र माना जाता है। यह प्लांट देश की बिजली जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। ऐसे में इस संवेदनशील इलाके के पास हुआ हमला UAE की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

सरकार ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में अलर्ट बढ़ा दिया है।

होर्मुज संकट के बीच बढ़ा तनाव

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र पहले से ही होर्मुज संकट और ईरान-अमेरिका तनाव की वजह से अस्थिर बना हुआ है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद UAE पर कई बार मिसाइल और ड्रोन हमले हो चुके हैं। इससे पहले भी ऊर्जा ठिकानों, तेल सुविधाओं और समुद्री ढांचे को निशाना बनाया गया था।

हालांकि इस ताजा हमले की जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन UAE अधिकारियों का दावा है कि हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन ईरान से जुड़े हो सकते हैं।

UAE पर सबसे ज्यादा हमलों का दावा

एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा असर UAE पर पड़ा है। दावा किया जा रहा है कि फरवरी के आखिर से अब तक UAE की ओर 2,800 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल दागे जा चुके हैं। लगातार हो रहे हमलों ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिका-ईरान वार्ता भी ठप

दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता भी फिलहाल रुकी हुई है। अमेरिका ने पिछले महीने अपने सीधे सैन्य हमले रोक दिए थे, लेकिन बाद में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी। जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण और सख्त कर दिया है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।

दुनिया की बढ़ी चिंता

बराकाह न्यूक्लियर प्लांट के पास हुआ यह हमला सिर्फ UAE ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

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