16 साल के लड़के को ‘बालिग’ बनाकर कोर्ट पहुंची पुलिस: आधार कार्ड ने खोली पोल, SP ने तलब की रिपोर्ट
उदयपुर की भूपालपुरा थाना पुलिस ने 16 साल 6 माह के नाबालिग लड़के को बालिग बताकर तहसीलदार कोर्ट में पेश कर दिया। वकीलों द्वारा आधार कार्ड जांचने पर मामला खुला, जिसके बाद तहसीलदार ने पेशी लेने से इनकार कर दिया। अब एसपी डॉ. अमृत दुहन ने मामले को गंभीर मानते हुए रिपोर्ट तलब की है।
राजस्थान के उदयपुर शहर में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। भूपालपुरा थाना पुलिस ने 16 साल 6 माह के एक नाबालिग लड़के को बालिग बताकर तहसीलदार कोर्ट में पेश कर दिया। मामला उस समय खुला जब कोर्ट में मौजूद वकीलों ने लड़के का आधार कार्ड चेक करवाया। आधार कार्ड में उम्र कम निकलने पर तहसीलदार ने पेशी लेने से साफ इनकार कर दिया। अब इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए उदयपुर एसपी डॉ. अमृत दुहन ने थानाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है।
SP ने कहा- पूरे मामले की जांच होगी
उदयपुर एसपी डॉ. अमृत दुहन ने कहा कि मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने बताया कि जांच की जाएगी कि आखिर इस केस में क्या खामी रही और किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल मच गई है, क्योंकि मामला सीधे नाबालिग से जुड़े कानूनी प्रावधानों की अनदेखी से जुड़ा हुआ है।
मारपीट केस में पकड़ा था युवक
जानकारी के अनुसार भूपालपुरा थाना पुलिस ने मारपीट के एक मामले में शुक्रवार शाम दो युवकों को पकड़ा था। दोनों को थाने लाकर गिरफ्तारी दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस उन्हें तहसीलदार कोर्ट में पेशी के लिए लेकर पहुंची।
जब तहसीलदार जब्बरसिंह चारण के सामने युवक की उम्र का मामला आया तो कोर्ट में मौजूद वकीलों ने आधार कार्ड मंगवाया। आधार कार्ड देखने पर पता चला कि युवक की उम्र 16 साल 6 माह है और वह नाबालिग है।
तहसीलदार ने पेशी लेने से किया इनकार
नाबालिग होने की पुष्टि होते ही तहसीलदार ने पेशी लेने से इनकार कर दिया। शुक्रवार रात करीब 8 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में इस मुद्दे को लेकर वकीलों, पेशकार और परिजनों के बीच काफी देर तक बहस और हंगामा चलता रहा।
करीब डेढ़ से दो घंटे तक माहौल गर्माया रहा। मामले के उजागर होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
बिना आधार कार्ड चेक किए दर्ज कर दी 18 साल उम्र
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई कि पुलिस ने युवक का आधार कार्ड या कोई अन्य दस्तावेज चेक ही नहीं किया। बिना सत्यापन के ही रिपोर्ट में उसकी उम्र 18 साल दर्ज कर दी गई।
अगर पुलिस पहले ही दस्तावेजों की जांच कर लेती तो यह गंभीर गलती नहीं होती।
थानाधिकारी बोले- परिजनों ने 18 साल उम्र बताई थी
भूपालपुरा थाना प्रभारी आदर्श कुमार परिहार ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि पुलिस ने लड़के और उसके परिजनों से उम्र पूछी थी। उन्होंने 18 साल उम्र बताई थी, इसलिए उसी आधार पर कार्रवाई की गई।
हालांकि कानूनी प्रक्रिया के अनुसार किसी भी नाबालिग को गिरफ्तार नहीं किया जाता, बल्कि उसे डिटेन कर किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया जाता है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि किसी भी आरोपी की उम्र की पुष्टि किए बिना उसे बालिग मान लेना गंभीर प्रशासनिक चूक है।
अब सभी की नजर एसपी की जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।