रविंद्र सिंह भाटी के आंदोलन के बीच कोर्ट का हस्तक्षेप, परिवहन रोकने वालों पर होगी कार्रवाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने बाड़मेर के गिरल लिग्नाइट माइंस में पिछले 38 दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच बड़ा आदेश जारी करते हुए लिग्नाइट परिवहन तुरंत शुरू कराने और वाहनों को पुलिस सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान के बाड़मेर जिले स्थित गिरल लिग्नाइट माइंस में पिछले 38 दिनों से जारी मजदूर आंदोलन के बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने गिरल माइंस से लिग्नाइट परिवहन तुरंत शुरू कराने, परिवहन कार्य में लगे वाहनों और कर्मचारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा काम में बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की अदालत ने यह आदेश मेसर्स श्री मोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी (SMCC) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किए। कोर्ट ने राजस्थान सरकार के गृह सचिव, बाड़मेर एसपी, शिव थाना अधिकारी और एसडीएम शिव को आदेश की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आदेश की अवमानना होने पर संबंधित लोगों की गिरफ्तारी की जाए।
कंपनी ने कोर्ट में क्या कहा
याचिकाकर्ता कंपनी की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें गिरल माइंस से लिग्नाइट परिवहन का वैध ठेका मिला हुआ है और वे पूरी तरह कानूनी तरीके से कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद कुछ पूर्व ठेकेदारों और स्थानीय ट्रांसपोर्ट यूनियनों द्वारा कर्मचारियों, ड्राइवरों और वाहनों को लगातार धमकियां दी जा रही हैं।
कंपनी का आरोप था कि कई बार परिवहन कार्य को जबरन रोकने की कोशिश की गई, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। कंपनी ने अदालत से मांग की थी कि पुलिस प्रशासन को सुरक्षा उपलब्ध कराने और बाधा डालने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि कंपनी के वैध परिवहन कार्य में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाए और वाहनों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी दबाव बनाकर परिवहन रोकने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए।
आंदोलन और राजनीति पर भी चर्चा
गिरल माइंस में पिछले कई दिनों से मजदूरों और स्थानीय लोगों का आंदोलन जारी है। आंदोलन के पीछे रोजगार, स्थानीय भागीदारी और परिवहन व्यवस्था से जुड़े मुद्दे बताए जा रहे हैं। इसी बीच क्षेत्रीय राजनीति भी इस आंदोलन में सक्रिय दिखाई दे रही है।
खबरों के अनुसार, विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे और आंदोलनकारियों के समर्थन में नजर आए। वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
“भीड़तंत्र नहीं, कानून सर्वोपरि”
हाईकोर्ट के आदेश को प्रशासनिक सख्ती और कानून व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि विकास कार्यों, रोजगार और सरकारी परियोजनाओं को बाधित करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
कोर्ट की टिप्पणी को ऐसे भी देखा जा रहा है कि अब आंदोलन की आड़ में परिवहन कार्य रोकने या कर्मचारियों को डराने-धमकाने वालों पर पुलिस कार्रवाई तेज हो सकती है।
क्षेत्र के विकास पर असर
गिरल लिग्नाइट परियोजना राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। लंबे समय से परिवहन बाधित रहने के कारण उत्पादन और सप्लाई प्रभावित हो रही थी। इससे स्थानीय रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए परिवहन को सुचारु रूप से शुरू करवाने की होगी।