आर्यिका माताजी हादसे पर जैन समाज में उबाल: कोटा में मौन प्रदर्शन, SIT जांच और ‘संत सुरक्षा कानून’ की मांग
कोटा में आर्यिका माताजी सड़क हादसे को लेकर जैन समाज ने मौन प्रदर्शन कर भारी विरोध जताया। समाज ने मामले की SIT या न्यायिक जांच, संत सुरक्षा के लिए सख्त कानून और राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की।
कोटा में आर्यिका माताजी सड़क हादसे को लेकर जैन समाज में भारी आक्रोश देखने को मिला। सोमवार को बड़ी संख्या में समाज के लोग सड़कों पर उतरे और मौन प्रदर्शन कर घटना के खिलाफ विरोध जताया। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए समाजजनों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हुए संतों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने तथा पूरे मामले की SIT जांच कराने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने घटना को बेहद दुखद और चिंताजनक बताते हुए जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विहाररत संत समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
वीडियो और डिजिटल सबूतों पर उठे सवाल
जैन समाज के अध्यक्ष प्रकाश जैन ने कहा कि 22 मई को विहाररत आर्यिकाओं के साथ हुई घटना सामान्य सड़क हादसा नहीं लगती। उन्होंने दावा किया कि घटना से जुड़े वीडियो फुटेज और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
समाज की ओर से मांग की गई कि पूरे मामले की SIT या न्यायिक जांच कराई जाए और सभी CCTV फुटेज व डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि निष्पक्ष जांच संभव हो सके।
“संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग
ज्ञापन में जैन समाज ने कहा कि जैन साधु-संत पूरी तरह अहिंसक और निहत्थे होते हैं तथा वे पैदल विहार करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था जरूरी है।
समाज ने “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की मांग करते हुए विहार मार्गों पर ट्रैफिक कंट्रोल, चेतावनी संकेतक, सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस समन्वय सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही भारत सरकार से “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” बनाने की भी मांग उठाई गई, ताकि संतों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट SOP और दिशा-निर्देश तय किए जा सकें।
असली ड्राइवर को बचाने के आरोप
प्रदर्शन के दौरान समाज के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद असली ड्राइवर फरार हो गया, जबकि किसी अन्य व्यक्ति को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया है। जैन समाज ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बचाया नहीं जाना चाहिए।
“तनाव नहीं, संतों की सुरक्षा चाहिए”
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का सामाजिक तनाव पैदा करना नहीं है। वे केवल यह चाहते हैं कि भविष्य में विहाररत संतों के साथ ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
समाज के लोगों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने और संत सुरक्षा को लेकर ठोस नीति लागू करने की मांग की।