नौतपा की तपती धूप में शुरू होगी 110 किमी की भौगीशैल परिक्रमा, सदीयो पुरानी परंपरा निभाने निकलेंगे श्रद्धालु..

जोधपुर में 25 मई से नौतपा की भीषण गर्मी के बीच 110 किलोमीटर लंबी भौगीशैल परिक्रमा शुरू होगी। लगभग 100 वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा का संचालन 1926 से हिंदू सेवा मंडल कर रहा है। कठिन पहाड़ी और कंटीले रास्तों वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पूर्व राजपरिवार के सदस्य भी शामिल होते हैं।

May 24, 2026 - 12:29
नौतपा की तपती धूप में शुरू होगी 110 किमी की भौगीशैल परिक्रमा, सदीयो पुरानी परंपरा निभाने निकलेंगे श्रद्धालु..

जोधपुर। शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली भौगीशैल परिक्रमा एक बार फिर आस्था का बड़ा केंद्र बनने जा रही है। करीब 100 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत इस बार 25 मई से श्रद्धालु 110 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा पर निकलेंगे। नौतपा की भीषण गर्मी के बीच होने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आसान नहीं होगी, क्योंकि यात्रा मार्ग में पहाड़ी इलाके, कंटीले रास्ते और कठिन चढ़ाई वाले क्षेत्र भी शामिल हैं।

1926 से लगातार निभाई जा रही परंपरा

भौगीशैल परिक्रमा का संचालन वर्ष 1926 से हिंदू सेवा मंडल की ओर से किया जा रहा है। लगभग एक सदी से यह धार्मिक परंपरा लगातार जारी है और समय के साथ इसकी पहचान और महत्व भी बढ़ता गया है। यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत का भी अहम हिस्सा माना जाता है।

हर तीन वर्ष में मिलता है अवसर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हिंदू पंचांग में अधिकमास आने के कारण यह परिक्रमा हर तीन वर्ष में आयोजित की जाती है। इसी वजह से श्रद्धालु लंबे समय तक इस आयोजन का इंतजार करते हैं। कई परिवार पीढ़ियों से इस परिक्रमा में शामिल होते आ रहे हैं और इसे अपनी धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं।

कठिन रास्तों से होकर गुजरती है यात्रा

करीब 110 किलोमीटर की यह यात्रा आसान नहीं मानी जाती। श्रद्धालुओं को पहाड़ी क्षेत्रों और कंटीले मार्गों से गुजरना पड़ता है। इस बार परिक्रमा नौतपा के दौरान शुरू हो रही है, ऐसे में तेज धूप और गर्म हवाएं भी श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बन सकती हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ यात्रा में शामिल होते हैं।

पूर्व राजपरिवार के सदस्य भी बनते हैं हिस्सा

भौगीशैल परिक्रमा की खास बात यह भी रही है कि इसमें आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ जोधपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य भी शामिल होते रहे हैं। इससे इस परिक्रमा का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तैयारियां

परिक्रमा को लेकर आयोजन समिति की ओर से आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारी की जा रही है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को पेयजल, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भीषण गर्मी के बीच लोगों को राहत मिल सके।

आस्था, परंपरा और धार्मिक विश्वास का संगम मानी जाने वाली यह परिक्रमा एक बार फिर जोधपुर में श्रद्धा का बड़ा दृश्य प्रस्तुत करने जा रही है।