जोधपुर हाईकोर्ट का सख्त ऐलान साइबर ठगों की कमर तोड़ने के लिए सरकार पर 6 बड़े फरमान, बच्चों से लेकर बैंकों तक सतर्कता के नए नियम!

राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर बेंच) ने एक साइबर ठगी के मामले की सुनवाई के दौरान साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार को 6 बड़े विस्तृत निर्देश जारी किए। कोर्ट ने साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर बनाने, एक व्यक्ति को 3 से ज्यादा सिम देने पर रोक, बच्चों के मोबाइल-सोशल मीडिया यूज पर SOP, विशेष IT इंस्पेक्टरों की भर्ती, बैंकों में AI टूल अनिवार्य करने और डिजिटल अरेस्ट से बचाव के लिए अलग SOP बनाने के सख्त आदेश दिए। साथ ही दो आरोपियों की जमानत भी खारिज कर दी।

Nov 29, 2025 - 09:59
जोधपुर हाईकोर्ट का सख्त ऐलान साइबर ठगों की कमर तोड़ने के लिए सरकार पर 6 बड़े फरमान, बच्चों से लेकर बैंकों तक सतर्कता के नए नियम!

जोधपुर, 29 नवंबर 2025: डिजिटल दुनिया में ठगी और साइबर अपराधों का साया तेजी से फैल रहा है, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने अब इसे रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। एक साइबर ठगी के मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने राज्य सरकार को साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर तुरंत कार्रवाई के विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि ये कदम प्रदेश में बढ़ते डिजिटल अपराधों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए जरूरी हैं। इस फैसले ने न सिर्फ आम नागरिकों में राहत की सांस ली है, बल्कि साइबर क्रिमिनल्स के लिए चेतावनी का संदेश भी दे दिया है। आइए, जानते हैं इस ऐतिहासिक फैसले की पूरी सच्चाई और गहराई से...

साइबर अपराधों पर लगाम लगाने का पूरा खाका

हाईकोर्ट ने ठगी के इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कई मोर्चों पर सक्रिय होने का आदेश दिया। कोर्ट का मानना है कि साइबर क्राइम रोकने के लिए निगरानी, रोकथाम और जागरूकता का त्रिस्तरीय ढांचा बनाना अनिवार्य है। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर की स्थापना: कोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह विभाग) को निर्देश दिया है कि प्रदेश स्तर पर एक मजबूत 'राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर' स्थापित किया जाए। यह सेंटर 24x7 निगरानी रखेगा, साइबर हमलों का त्वरित विश्लेषण करेगा और पुलिस को रीयल-टाइम अलर्ट भेजेगा। कोर्ट ने कहा कि यह केंद्र अगले तीन महीनों में चालू हो, ताकि साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग और जांच में देरी न हो। 

सिम कार्डों पर सख्त पाबंदी: एक व्यक्ति के नाम पर तीन से अधिक मोबाइल सिम कार्ड जारी करने पर पूर्ण रोक लगाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का फरमान जारी किया गया। कोर्ट ने टेलीकॉम विभाग को चेतावनी दी कि आधार-लिंक्ड सत्यापन को और मजबूत किया जाए, क्योंकि अधिकांश साइबर ठगियां फर्जी सिमों के जरिए ही होती हैं। यह कदम सिम-बेस्ड फ्रॉड को 50% तक कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए विशेष SOP: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के स्कूलों में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर नियंत्रण के लिए अलग से SOP बनाने का आदेश। कोर्ट ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि स्कूलों में 'डिजिटल लिटरेसी' को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, जहां बच्चों को ऑनलाइन खतरे जैसे ग्रूमिंग, साइबर बुलिंग और फेक न्यूज से बचने की ट्रेनिंग दी जाए। अभिभावकों के लिए भी जागरूकता कैंपेन चलाने को कहा गया है, ताकि नई पीढ़ी सुरक्षित रहे।

विशेष आईटी इंस्पेक्टरों की भर्ती: गृह विभाग और कार्मिक विभाग मिलकर साइबर जांच के लिए विशेष 'आईटी इंस्पेक्टरों' की भर्ती करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये अधिकारी साइबर फॉरेंसिक, डेटा एनालिसिस और डिजिटल एविडेंस कलेक्शन में पारंगत हों। कम से कम 200 ऐसी नियुक्तियां अगले साल तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जो पुलिस की साइबर विंग को मजबूत बनाएंगे।

बैंकों और फिनटेक कंपनियों पर AI का दबाव: बैंक और फिनटेक कंपनियों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 'म्यूल हंटर' जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का अनिवार्य उपयोग करने को कहा गया। ये टूल्स संदिग्ध ट्रांजेक्शन को तुरंत पकड़ेंगे और 'मनी म्यूल' (जिनके खातों का ठग इस्तेमाल करते हैं) अकाउंट्स को ब्लॉक करेंगे। कोर्ट ने वित्त विभाग को रिपोर्ट मांग ली है कि ये टूल्स कितने प्रभावी ढंग से लागू हो रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट से बचाव का खास SOP: आजकल 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम का बोलबाला है, जहां ठग वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस बताकर लोगों को ब्लैकमेल करते हैं। कोर्ट ने इसके खिलाफ एक समर्पित SOP बनाने का निर्देश दिया, जिसमें जन जागरूकता अभियान, हेल्पलाइन नंबर (जैसे 1930) का प्रचार और त्वरित शिकायत निवारण शामिल हो। कोर्ट ने कहा कि कोई भी नागरिक 'वर्चुअल गिरफ्तारी' के दावे पर बिना जांच के पैसे न दे।

मामले की पृष्ठभूमि: ठगी का केस जो बदला साइबर कानून का चेहरा

यह निर्देश एक साइबर ठगी के केस की सुनवाई के दौरान आए, जहां एक 20 वर्षीय युवक पर आरोप था कि उसने फर्जी ऐप के जरिए लोगों से पैसे ऐंठे। कोर्ट ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी, क्योंकि जांच में उनके खिलाफ मजबूत डिजिटल सबूत मिले। जस्टिस जैन ने टिप्पणी की, "साइबर क्राइम अब सिर्फ तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि समाज की जड़ें हिला रहा है। सरकार को अब सोचना छोड़कर अमल करना होगा।" कोर्ट ने गृह विभाग को हर दो माह में साइबर अपराधों की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को भी कहा। 

क्या होगा असर? विशेषज्ञों की राय

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ये निर्देश राजस्थान को साइबर सिक्योर स्टेट बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। पिछले एक साल में प्रदेश में साइबर ठगियों के 50,000 से ज्यादा केस दर्ज हुए, जिनमें 70% डिजिटल अरेस्ट और UPI फ्रॉड से जुड़े थे। इन SOPs से नुकसान को 40% तक कम किया जा सकता है। हालांकि, अमल में देरी न हो, इसके लिए कोर्ट ने फॉलो-अप सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है।यह फैसला न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा, जहां साइबर क्राइम सालाना 30% की रफ्तार से बढ़ रहा है। नागरिकों से अपील है कि संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!