चित्तौड़गढ़ के स्कूल में बड़ा हादसा टला: रात में गिरी बरामदे की 11 पट्टियां, छुट्टियां नहीं होतीं तो जा सकती थीं कई जानें

चित्तौड़गढ़ जिले के भूपाल सागर क्षेत्र स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जाशमा में बरामदे की 11 पट्टियां अचानक गिर गईं। घटना रात में और ग्रीष्मावकाश के दौरान होने से बड़ा हादसा टल गया।

May 23, 2026 - 13:01
चित्तौड़गढ़ के स्कूल में बड़ा हादसा टला: रात में गिरी बरामदे की 11 पट्टियां, छुट्टियां नहीं होतीं तो जा सकती थीं कई जानें

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में एक सरकारी स्कूल में बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भूपाल सागर क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जाशमा में गुरुवार रात स्कूल भवन के बरामदे की छत की 11 पट्टियां अचानक भरभराकर नीचे गिर गईं। घटना के समय स्कूल बंद था और ग्रीष्मावकाश चल रहा था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

हालांकि इस हादसे ने स्कूल भवनों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यदि यह घटना स्कूल समय में होती, तो कई बच्चों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

देर रात तेज धमाके से दहशत

जानकारी के अनुसार गुरुवार रात अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। आसपास रहने वाले ग्रामीण आवाज सुनकर घबरा गए। शुक्रवार सुबह लोगों को पता चला कि राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जाशमा के बरामदे की छत की पट्टियां गिर गई हैं।

घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक स्कूल परिसर पहुंच गए। लोगों ने स्कूल भवन की हालत देखकर चिंता जताई। विद्यालय में पहली से बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है और आसपास के गांवों के सैकड़ों बच्चे यहां शिक्षा ग्रहण करते हैं।

प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी पहुंचे मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उपखंड मजिस्ट्रेट महेश कुमार गगोरिया, शिक्षा विभाग के अधिकारी लक्ष्मण सिंह चुंडावत, मुरलीधर शर्मा, एईएन रणजीत सिंह गोदारा और स्थानीय सरपंच देवीलाल लोहार ने स्कूल भवन का निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने स्कूल स्टाफ से घटना की जानकारी ली और भवन की स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि स्कूल का यह हिस्सा काफी पुराना और जर्जर हो चुका था।

सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग के निर्देश

प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से क्षतिग्रस्त हिस्से के आसपास बैरिकेडिंग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वहां बच्चों और आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोकने को कहा गया है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।

अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी टीम भवन की विस्तृत जांच करेगी और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पहले से जर्जर था भवन

जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार विद्यालय भवन को पहले ही मरम्मत योग्य श्रेणी में रखा गया था। भवन की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए जिला खनिज प्रतिष्ठान संस्थान (DMFT) फंड से करीब पांच लाख रुपए की राशि भी एक महीने पहले स्वीकृत की जा चुकी थी।

लेकिन समय पर मरम्मत कार्य शुरू नहीं होने के कारण यह हादसा हो गया। ग्रामीणों ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है।

ग्रामीणों में आक्रोश, जिम्मेदारों पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत कार्य शुरू हो जाता, तो यह स्थिति नहीं बनती। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार भवन की खराब हालत की जानकारी अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले पूरे स्कूल भवन की फिटनेस जांच कराई जाए और जर्जर हिस्सों का पुनर्निर्माण कराया जाए।

सरकारी स्कूलों की हालत पर फिर उठे सवाल

इस घटना के बाद सरकारी स्कूल भवनों की गुणवत्ता और रखरखाव पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं, जहां बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और शिक्षा विभाग को ऐसे भवनों की नियमित जांच करवानी चाहिए।

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