लड़की की ‘चुप्पी’ को माना जाएगा शादी की सहमति, बाल विवाह पर बढ़ा विवाद; जानिए आखिर कहां का है ये मामला

तालिबान शासन ने अफगानिस्तान में शादी, तलाक और बाल विवाह से जुड़ा नया पारिवारिक कानून लागू किया है।

May 23, 2026 - 11:32
लड़की की ‘चुप्पी’ को माना जाएगा शादी की सहमति, बाल विवाह पर बढ़ा विवाद; जानिए आखिर कहां का है ये मामला

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक नया और बेहद विवादित पारिवारिक कानून लागू किया है, जिसे लेकर दुनियाभर में बहस छिड़ गई है। शादी, तलाक, बाल विवाह और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस नए कानून को तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा की मंजूरी के बाद आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। अफगानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 अनुच्छेदों वाले इस कानून का शीर्षक “पति-पत्नी के बीच अलगाव के सिद्धांत” रखा गया है। इसमें विवाह, सहमति, नाबालिगों की शादी, लापता पति, धर्म परिवर्तन, व्यभिचार और पारिवारिक विवादों से जुड़े कई धार्मिक और कानूनी प्रावधान शामिल किए गए हैं।

लड़की की चुप्पी को माना जाएगा शादी की मंजूरी

इस कानून का सबसे विवादित हिस्सा वह प्रावधान है, जिसमें कहा गया है कि अगर कोई कुंवारी लड़की यौवन प्राप्त कर चुकी है और शादी के प्रस्ताव पर चुप रहती है, तो उसकी चुप्पी को सहमति माना जा सकता है। हालांकि नियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी लड़के या पहले से शादीशुदा महिला की चुप्पी को सहमति नहीं माना जाएगा। इस प्रावधान को लेकर महिला अधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने गंभीर चिंता जताई है। आलोचकों का कहना है कि यह महिलाओं की स्वतंत्र इच्छा और अधिकारों को कमजोर करता है।

बाल विवाह को लेकर भी बड़ा प्रावधान

नए नियम के अनुच्छेद 5 में कहा गया है कि अगर किसी नाबालिग की शादी उसके पिता या दादा के अलावा किसी अन्य रिश्तेदार द्वारा तय की जाती है, तब भी उसे कानूनी रूप से वैध माना जा सकता है। इसके लिए शर्त रखी गई है कि दूल्हा-दुल्हन सामाजिक रूप से “मेल खाते” हों और दहेज “उचित” हो।हालांकि कानून में यह भी कहा गया है कि बच्चा बालिग होने के बाद उस शादी को रद्द करवाने की मांग कर सकता है। लेकिन इसके लिए तालिबान की अदालत से अनुमति लेना जरूरी होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रावधान बाल विवाह को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता देता है और नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा को कमजोर कर सकता है।

जजों को मिले व्यापक अधिकार

तालिबान के इस नए कानून में जजों को कई संवेदनशील मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार दिया गया है। इनमें व्यभिचार, धर्म-त्याग, पति की लंबे समय तक गैर-मौजूदगी और “जिहार” जैसे मामले शामिल हैं।

“जिहार” इस्लामी परंपरा का एक पुराना सिद्धांत है, जिसमें पति अपनी पत्नी की तुलना किसी ऐसी महिला रिश्तेदार से करता है जिससे शादी करना धार्मिक रूप से प्रतिबंधित होता है।

इन मामलों में तालिबान की अदालतें अलगाव, सजा या जेल भेजने जैसे फैसले दे सकती हैं।

महिलाओं पर पहले से ही सख्त पाबंदियां

अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान सरकार लगातार महिलाओं और लड़कियों पर सख्त प्रतिबंध लगाती रही है। अफगानिस्तान में लड़कियों की छठी कक्षा के बाद पढ़ाई पर रोक है। महिलाओं के विश्वविद्यालय जाने पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

इसके अलावा रोजगार, अकेले यात्रा करने, सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने और कई सरकारी क्षेत्रों में काम करने पर भी कड़ी पाबंदियां लागू हैं।

मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई विशेषज्ञों ने तालिबान की नीतियों को “जेंडर अपार्थाइड” यानी लैंगिक भेदभाव की संगठित व्यवस्था बताया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

‘गर्ल्स नॉट ब्राइड्स’ समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान में बाल विवाह की स्थिति पहले से गंभीर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की लगभग एक-तिहाई लड़कियों की शादी 18 वर्ष से पहले कर दी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नए कानून से महिलाओं और बच्चियों की स्थिति और कमजोर हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार तालिबान से महिलाओं के अधिकार बहाल करने और शिक्षा व स्वतंत्रता पर लगी पाबंदियां हटाने की मांग कर रहा है।

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