बाड़मेर के सीमा गांव बाखासर में ऐतिहासिक आयोजन: 1971 युद्ध के वीर ठाकुर बलवंत सिंह की प्रतिमा और स्मारक का अनावरण, केंद्रीय मंत्री व डिप्टी सीएम रहेंगे शिरकत

13 दिसंबर को बाड़मेर के सीमा गांव बाखासर में 1971 भारत-पाक युद्ध के वीर सीमा प्रहरी ठाकुर बलवंत सिंह बाखासर की प्रतिमा और स्मारक का अनावरण होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी मुख्य अतिथि होंगे।

Dec 9, 2025 - 12:38
बाड़मेर के सीमा गांव बाखासर में ऐतिहासिक आयोजन: 1971 युद्ध के वीर ठाकुर बलवंत सिंह की प्रतिमा और स्मारक का अनावरण, केंद्रीय मंत्री व डिप्टी सीएम रहेंगे शिरकत

बाड़मेर, 9 दिसंबर 2025: राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के बाखासर गांव में 13 दिसंबर को एक ऐतिहासिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यहां 1971 के भारत-पाक युद्ध के वीर नायक, सीमा प्रहरी ठाकुर बलवंत सिंह बाखासर की प्रतिमा और स्मारक का अनावरण होगा। इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी सहित कई प्रमुख नेता और समाजसेवी उपस्थित रहेंगे। यह समारोह न केवल बलवंत सिंह के शौर्य को सम्मानित करेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रसेवा की भावना को भी प्रज्वलित करेगा।

1971 युद्ध में बलवंत सिंह की अमर गाथा ठाकुर बलवंत सिंह बाखासर एक सच्चे देशभक्त और सीमा प्रहरी थे, जिन्होंने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी। उनके पुत्र रतन सिंह बाखासर ने बताया कि उनके पिता ने युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 10 पैरा स्पेशल फोर्स के कमांडिंग अधिकारी, ब्रिगेडियर स्व. महाराजा भवानी सिंह एमवीसी (जयपुर) के सहयोग से महत्वपूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराई थीं। बलवंत सिंह ने पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों, घुसपैठ के रास्तों और दुश्मन की योजनाओं की सटीक जानकारी भारतीय सेना को दी, जिससे राष्ट्रहित सर्वोपरि रहा।खास तौर पर, 'मिशन छाछरो रेड' के दौरान बलवंत सिंह ने भारतीय सेना, बीएसएफ और स्थानीय पुलिस के साथ पूर्ण समन्वय स्थापित किया। उनकी सूचनाओं के आधार पर दुश्मन की घुसपैठ को विफल किया गया और पाकिस्तानी फौज की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को चकनाचूर कर दिया गया। बलवंत सिंह का यह योगदान न केवल बाखासर गांव के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। वे एक सामान्य सीमावासी थे, लेकिन उनके साहस ने इतिहास रच दिया। उनकी स्मृति में बनाया जा रहा यह स्मारक भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक जीवंत उदाहरण बनेगा, जो बताएगा कि कैसे एक व्यक्ति की देशभक्ति ने युद्ध का पलड़ा पलट दिया।

प्रमुख अतिथियों की सूची: राष्ट्रीय स्तर के दिग्गजों का सम्मान इस भव्य समारोह में केंद्रीय स्तर के कई प्रमुख हस्तियां शिरकत करेंगी, जो इस आयोजन को राष्ट्रीय महत्व का बना देंगी। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिमा अनावरण में भाग लेंगे। वे न केवल बलवंत सिंह के शौर्य को सलाम करेंगे, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास पर भी अपने विचार साझा कर सकते हैं। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी उपस्थित रहेंगे, जो इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन कर सकते हैं। राजस्थान सरकार की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी की मौजूदगी आयोजन को राज्य स्तर पर और मजबूत बनाएगी।इसके अलावा, स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर के कई नेता व समाजसेवी भी शामिल होंगे। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के क्षेत्रीय प्रचारक नींबाराम, सीमा जन कल्याण समिति के अखिल भारतीय सह-संयोजक नींब सिंह, पोकरण विधायक महंत प्रताप पुरी महाराज, चौहटन विधायक आदूराम मेघवाल और शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी प्रमुख हैं। ग्रामीणों और सीमावासियों की भारी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जो इस समारोह को एक जन-आंदोलन का रूप देगी।

कार्यक्रम का विस्तृत शेड्यूल: सांस्कृतिक झलक के साथ अनावरण समारोह का आयोजन बाखासर के बलवंत चौक पर किया जाएगा, जहां प्रतिमा स्थापित की गई है। कार्यक्रम का शेड्यूल इस प्रकार रहेगा:सुबह 7:00 बजे: लोक साहित्यकार हरीश दान गढ़वी और प्रकाश माली द्वारा डायरा (पारंपरिक लोक नृत्य) और लोक गीतों की मनमोहक प्रस्तुति। यह सत्र राजस्थानी संस्कृति की जीवंतता को प्रदर्शित करेगा और उपस्थितजनों को युद्ध के वीरों की गाथाओं से जोड़ेगा।सुबह 11:00 बजे: प्रतिमा और स्मारक का औपचारिक अनावरण। इस दौरान केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, गजेंद्र सिंह शेखावत और उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी संयुक्त रूप से पर्दा हटाएंगे। अनावरण के बाद श्रद्धांजलि सभा होगी, जिसमें बलवंत सिंह के जीवन और योगदान पर वक्तव्य दिए जाएंगे।कार्यक्रम में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, खासकर सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण। स्थानीय प्रशासन ने यातायात और आवास व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया है। यह आयोजन न केवल बाखासर को पर्यटन मानचित्र पर चमकाएगा, बल्कि 1971 युद्ध की अनसुनी कहानियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा।