सीमा पर अब सैनिकों के साथ उड़ेंगे हजारों ड्रोन: भारत बदलने जा रहा युद्ध का पूरा खेल, जयपुर में होगा बड़ा सैन्य मंथन

भारत अब भविष्य के हाईटेक युद्ध की तैयारी में जुट गया है। सेना के साथ हजारों ड्रोन मोर्चा संभालेंगे, एक लाख ड्रोन की ताकत तैयार होगी और जयपुर में होने वाला बड़ा सैन्य सम्मेलन देश की नई रक्षा रणनीति तय करेगा।

May 7, 2026 - 13:47
सीमा पर अब सैनिकों के साथ उड़ेंगे हजारों ड्रोन: भारत बदलने जा रहा युद्ध का पूरा खेल, जयपुर में होगा बड़ा सैन्य मंथन

भारत अब पारंपरिक युद्ध की रणनीति से आगे बढ़कर भविष्य के हाईटेक और टेक्नोलॉजी आधारित युद्ध की तैयारी में जुट गया है। आने वाले समय में देश की सीमाओं पर सिर्फ सैनिक ही नहीं, बल्कि हजारों ड्रोन भी एक साथ मोर्चा संभालते नजर आएंगे। भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने अब एक विशेष “ड्रोन फोर्स” तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है, जो युद्ध के दौरान सबसे पहले जवाबी कार्रवाई करेगी। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह नई ड्रोन फोर्स किसी भी सैन्य ऑपरेशन में “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” की भूमिका निभाएगी। यानी खतरे का पहला जवाब इंसानों से पहले मशीनें देंगी। इस पूरी व्यवस्था को डेटा और कॉग्निटिव वॉरफेयर सिस्टम का तकनीकी सपोर्ट मिलेगा।

हर जवान के साथ होगा अपना ड्रोन

भारतीय सेना की योजना भविष्य में हर सैनिक को व्यक्तिगत ड्रोन से लैस करने की है। इसका मतलब यह होगा कि युद्ध के मैदान में सैनिकों के साथ हजारों ड्रोन भी सक्रिय रहेंगे। सेना की तैयारी हर कोर में लगभग 8 हजार ड्रोन तैनात करने की है, जबकि लंबे समय में करीब एक लाख ड्रोन की विशाल ताकत खड़ी करने का लक्ष्य रखा गया है। इन ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों की पहचान, हथियार पहुंचाने और तत्काल जवाबी कार्रवाई जैसे मिशनों में किया जाएगा।

AI और वर्चुअल रियलिटी से मिलेगी ट्रेनिंग

भारतीय सेना अब अपने जवानों को आधुनिक तकनीक के जरिए तैयार कर रही है। अगले तीन वर्षों में देशभर में 15 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे, जहां सैनिकों को ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हाईटेक युद्ध तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इन सेंटरों को महू के इंफेंट्री स्कूल, देवलाली के आर्टिलरी स्कूल, देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) और चेन्नई व गया की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से जोड़ा जाएगा। यहां जवानों को सिम्युलेटर और वर्चुअल रियलिटी के जरिए रियल टाइम बैटल ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि भविष्य के युद्धों में वे तेजी से निर्णय ले सकें।

BSF और ITBP भी होंगे नेटवर्क का हिस्सा

भविष्य में केवल सेना ही नहीं, बल्कि BSF और ITBP जैसे सीमा सुरक्षा बलों को भी इस हाईटेक ड्रोन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे सीमा सुरक्षा, निगरानी और आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन और ज्यादा मजबूत होंगे।

रक्षा उत्पादन में भारत की बड़ी छलांग

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से काम शुरू किया है। देश का रक्षा उत्पादन अब करीब 1 लाख 54 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करना और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत बनाना है। यही वजह है कि 7 लाख 35 हजार करोड़ रुपये के रक्षा बजट का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अब भारतीय कंपनियों पर खर्च किया जा रहा है।

ड्रोन और AI सेक्टर में स्टार्टअप्स की एंट्री

पिछले एक साल में डिफेंस सेक्टर में 120 नए स्टार्टअप शुरू हुए हैं। इनमें करीब 20 कंपनियां विशेष रूप से ड्रोन, AI और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं। इनके साथ लगभग 16 हजार MSME जुड़कर रक्षा उत्पादन को सपोर्ट दे रहे हैं।

मिसाइल टेक्नोलॉजी में भी आत्मनिर्भर भारत

भारत अब मिसाइल टेक्नोलॉजी में भी तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। मिसाइलों के सेंसर, गाइडेंस सिस्टम, इंजन, बूस्टर और टाइटेनियम फोर्जिंग जैसी अहम तकनीकें अब भारतीय कंपनियां तैयार कर रही हैं। पीटीसी इंडस्ट्रीज, डेटा पैटर्न्स और सोलर इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां इसमें बड़ी भूमिका निभा रही हैं। ब्रह्मोस मिसाइल में भारतीय पुर्जों की हिस्सेदारी पहले सिर्फ 15 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 72 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

विदेशी कंपनियों को भारत का साफ संदेश

भारत ने अब विदेशी रक्षा कंपनियों को भी साफ संदेश दे दिया है कि केवल हथियार खरीदने का दौर खत्म हो रहा है। अब टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के बिना कोई बड़ी डील नहीं होगी।

अमेरिका के प्रीडेटर ड्रोन, GE-F414 इंजन, फ्रांस के राफेल सिस्टम और इजराइल की बराक-8 मिसाइल व हेरॉन मार्क-2 ड्रोन जैसी डील्स पर चर्चा जारी है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि तकनीक साझा करनी होगी।

जयपुर में होगा बड़ा सैन्य मंथन

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 7 और 8 मई को संयुक्त कमांडरों का बड़ा सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इसमें रक्षा मंत्री, CDS और तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे।

इस सम्मेलन में थिएटर कमांड, ड्रोन वॉरफेयर, AI आधारित रक्षा प्रणाली और भविष्य की युद्ध रणनीतियों पर बड़ा मंथन होगा। माना जा रहा है कि यह बैठक भारत की आने वाली सैन्य नीति की दिशा तय कर सकती है।

बदल रहा है युद्ध का भविष्य

भारत अब केवल सेना की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित युद्ध क्षमता मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। ड्रोन, AI, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और स्वदेशी हथियार निर्माण के जरिए देश भविष्य के युद्धों के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करने में जुटा है।

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