टेबल पर बात हुई तो धूजणी छूटेगी, जरूरत पड़ी तो खून भी बहाऊंगा...रविंद्र सिंह भाटी ने ऐसा क्यों कहा? जानिए पूरी मामला

गिरल में माइनिंग को लेकर बवाल बढ़ा… रविंद्र सिंह भाटी धरने पर उतरे, कंपनी पर बड़े आरोप—क्या होगा अब अगला कदम?

May 6, 2026 - 08:04
टेबल पर बात हुई तो धूजणी छूटेगी, जरूरत पड़ी तो खून भी बहाऊंगा...रविंद्र सिंह भाटी ने ऐसा क्यों कहा? जानिए पूरी मामला

राजस्थान के बाड़मेर जिले के गिरल गांव में लिग्नाइट खनन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी मंगलवार को किसानों और स्थानीय युवाओं के समर्थन में धरने पर बैठ गए। यह धरना पिछले लगभग एक महीने से जारी है, जहां ग्रामीण अपनी जमीन, रोजगार और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

धरना स्थल पर पहुंचकर भाटी ने भावुक अंदाज में कहा कि जनता ने उनके लिए पसीना बहाया है और जरूरत पड़ी तो वे खून भी बहाने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने प्रशासन और अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो हालात बिगड़ सकते हैं।

 क्या है पूरा मामला?

गिरल और आसपास के इलाकों में राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएमएल) द्वारा लिग्नाइट खनन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। आरोप है कि कंपनी ने स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन अब कई युवाओं को नौकरी से निकाल दिया गया है।

इसी मुद्दे को लेकर 9 अप्रैल से किसान और युवा धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें न तो रोजगार मिला और न ही प्रदूषण से राहत।

प्रदूषण और स्वास्थ्य पर असर

धरने में शामिल लोगों का कहना है कि खनन गतिविधियों के कारण क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ गया है। दिन-रात चल रही माइनिंग से धूल और धुएं का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

विधायक भाटी ने दावा किया कि इस प्रदूषण के कारण स्थानीय लोगों की उम्र तक 10 साल कम हो गई है।

 नियमों की अनदेखी के आरोप

भाटी ने कंपनी और ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि:

माइनिंग क्षेत्र में सुरक्षा के लिए कोई तारबंदी नहीं की गई

खेतों में मलबा डंप किया जा रहा है

पर्यावरण नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कंपनी खुद नियमों का पालन नहीं कर रही, तो वह दूसरों को नियमों की सीख कैसे दे सकती है।

 पेड़ लगाने के दावे पर विवाद

विधानसभा में आरएसएमएमएल द्वारा 52 से 65 हजार पौधे लगाने का दावा किया गया था। लेकिन भाटी ने इसे झूठा बताते हुए कहा कि मौके पर एक भी पौधा नहीं मिला।

उन्होंने अधिकारियों के साथ मौके का दौरा किया, जहां कथित तौर पर बबूल के पेड़ दिखाकर खानापूर्ति की गई।

 रोजगार और अधिकारों की लड़ाई

धरने में शामिल युवाओं का कहना है कि उन्हें बिना कारण नौकरी से निकाल दिया गया। पिछले 25-30 दिनों से वे अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कंपनी और ठेकेदार उनकी बात सुनने तक नहीं आए।

भाटी ने कहा कि प्रदेश में मजदूरों के अधिकारों का हनन हो रहा है और उन्हें अपने हक के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।

आरएसएमएमएल का परिचय

राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड राजस्थान सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, जो लिग्नाइट, रॉक फॉस्फेट, जिप्सम और लाइमस्टोन का खनन करता है।

गिरल लिग्नाइट माइंस की शुरुआत 1994 में हुई थी और इसे राज्य की पहली आधुनिक ओपनकास्ट खदान माना जाता है। यहां उत्पादित लिग्नाइट का उपयोग पावर प्लांट को ईंधन सप्लाई के लिए किया जाता है।

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