जयपुर में बीजेपी के नाम पर 30 करोड़ का फर्जी टेंडर वायरल, नेताओं के नकली हस्ताक्षरों से मचा हड़कंप
जयपुर में बीजेपी के नाम और लेटरहेड का कथित दुरुपयोग कर 30 करोड़ रुपये का फर्जी टेंडर जारी करने का मामला सामने आया है। दस्तावेजों में बड़े नेताओं के नकली हस्ताक्षर, फर्जी निर्देश और बैंक अकाउंट की जानकारी तक शामिल होने से राजनीतिक और साइबर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजधानी जयपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राजनीतिक हलकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी है। भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी के नाम और लेटरहेड का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करते हुए 30 करोड़ रुपये का फर्जी टेंडर जारी करने का मामला सामने आया है। इस कथित फर्जीवाड़े में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नकली हस्ताक्षर तक इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि जालसाजों ने “नमोदूत राजस्थान” कैंपेन के नाम पर एक फर्जी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) तैयार किया। दस्तावेज को इस तरह डिजाइन किया गया कि पहली नजर में यह पूरी तरह आधिकारिक लगे। इसके बाद इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और विभिन्न ग्रुप्स में वायरल कर दिया गया, जिससे कई लोग इसे असली समझ बैठे।
मामला सामने आने के बाद बीजेपी के सोशल मीडिया विभाग ने इसे गंभीर साजिश बताते हुए जयपुर के अशोक नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अज्ञात लोगों ने बीजेपी के राष्ट्रीय आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के नाम का इस्तेमाल करते हुए नकली दस्तावेज तैयार किए।
फर्जी दस्तावेजों में क्या-क्या था?
जानकारी के अनुसार, वायरल किए गए दस्तावेजों में सिर्फ टेंडर ही नहीं, बल्कि संगठनात्मक नियुक्तियों और चुनावी अभियानों से जुड़े कथित निर्देश भी शामिल थे। दस्तावेजों को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो ये सीधे पार्टी मुख्यालय या वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से जारी किए गए हों।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इन फर्जी दस्तावेजों में एक बैंक अकाउंट नंबर भी दिया गया था, जिसमें अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट यानी EMD जमा कराने की बात कही गई थी। इससे यह आशंका और गहरा गई है कि यह मामला सिर्फ राजनीतिक भ्रम फैलाने तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक ठगी की बड़ी साजिश भी हो सकता है।
बीजेपी ने जताई साजिश की आशंका
बीजेपी सोशल मीडिया विभाग के प्रदेश सह-संयोजक अजय विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि कुछ लोग पार्टी की छवि खराब करने और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए फर्जी दस्तावेज वायरल कर आम लोगों और कार्यकर्ताओं को भ्रमित किया गया।
उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। पार्टी का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक विश्वास दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं।
साइबर एंगल से जांच में जुटी पुलिस
फिलहाल जयपुर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, इन्हें सोशल मीडिया पर सबसे पहले किसने शेयर किया और बैंक अकाउंट किसके नाम पर खोला गया।
साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से डिजिटल ट्रेल खंगाली जा रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं यह संगठित साइबर ठगी गिरोह का काम तो नहीं, जो राजनीतिक नामों का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहा हो।
सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा फर्जी कंटेंट
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैलने वाले फर्जी दस्तावेजों और गलत सूचनाओं के खतरे को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी राजनीतिक या सरकारी दस्तावेज पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना बेहद जरूरी है। फिलहाल इस पूरे मामले ने राजस्थान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है।