आखिर ऐसा क्यों बोला रविंद्र सिंह भाटी ने की अफसर का पशु गायब होता तो सड़क पर होता पूरा प्रशासन? जानिए पूरा मामला
शिव में एक तरफ लापता नाबालिग को लेकर परिवार का दर्द सड़कों पर है, तो दूसरी ओर गिरल में किसानों का गुस्सा भड़क रहा है। ऐसे में विधायक रविंद्र सिंह भाटी के तेवर तेज क्या अब बदलेगा प्रशासन का रवैया?
राजस्थान के बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को सियासी और सामाजिक हलचल तेज रही, जब विधायक रविंद्र सिंह भाटी दो अलग-अलग धरनों में शामिल हुए और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। सबसे पहले भाटी गिरल गांव से रवाना होकर शिव थाने के सामने चल रहे धरने में पहुंचे, जहां एक दलित परिवार पिछले 10 दिनों से अपनी लापता नाबालिग बच्ची को ढूंढने और न्याय की मांग को लेकर बैठा है। बच्ची को लापता हुए करीब 4 महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है।
“ताली बजाने की नहीं, शर्म की बात है” भाटी
धरना स्थल पर पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद भाटी ने लोगों के साथ शिव थाने का घेराव किया। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर किसी बड़े अधिकारी का पशु भी गायब हो जाए, तो पूरा सिस्टम हरकत में आ जाता है, लेकिन यहां एक गरीब परिवार की बच्ची 4 महीने से गायब है और पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। जब उनके संबोधन के दौरान लोग तालियां बजाने लगे, तो भाटी ने उन्हें रोकते हुए कहा कि यह खुशी का नहीं, बल्कि शर्म का विषय है। उन्होंने साफ कहा कि अब तक उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से समाधान की कोशिश की, लेकिन प्रशासन की उदासीनता साफ नजर आ रही है। भाटी ने यह भी कहा कि प्रशासन यह न सोचे कि यह परिवार अकेला है। “मैं इनके साथ खड़ा हूं और अगर जरूरत पड़ी तो मैं भी यहीं धरने पर बैठूंगा,” उन्होंने चेतावनी दी।
गिरल में किसानों के साथ बिताई रात
इससे पहले मंगलवार को भाटी गिरल गांव पहुंचे, जहां 9 अप्रैल से किसान और स्थानीय युवा धरने पर बैठे हैं। ये लोग राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) की लिग्नाइट खनन परियोजना के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।