“बाड़मेर के जालीपा में खनन के बीच 5 स्कूल बंद क्यों? क्या है इसके पीछे का सच, जानिए पूरा मामला”

बाड़मेर के जालीपा में 5 स्कूल मर्ज… 50 बच्चों की पढ़ाई पर संकट। फैसला क्यों हुआ? सवाल उठ रहे हैं… पूरी खबर चौंकाने वाली है।

May 5, 2026 - 09:30
“बाड़मेर के जालीपा में खनन के बीच 5 स्कूल बंद क्यों? क्या है इसके पीछे का सच, जानिए पूरा मामला”

बाड़मेर जिले के जालीपा क्षेत्र में प्रस्तावित कोयला खनन परियोजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन परियोजना के विस्तार के नाम पर क्षेत्र के सरकारी स्कूलों को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है, जिससे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।

डूडियों की ढाणी (वीरमनगर जालीपा) सहित आसपास के गांवों में स्कूल मर्जर के फैसले के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

स्कूलों के अस्तित्व पर संकट

प्राथमिक विद्यालय डूडियों की ढाणी (वीरमनगर जालीपा) सहित क्षेत्र के कुल पांच सरकारी स्कूलों—राप्रावि बेनीवालों की ढाणी, राउमावि हरसाणी फांटा (चक धोलका), राजकीय स्कूल कुम्हारों की ढाणी और राप्रावि मांधल की ढाणी—को मर्ज किए जाने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि इन स्कूलों को बिना उचित कारण दूसरे विद्यालयों में विलय कर दिया गया, जबकि कई स्कूलों में पर्याप्त छात्र संख्या मौजूद थी।

 नामांकन घटाने और शिक्षक हटाने के आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पहले स्कूल का नामांकन जानबूझकर कम दिखाया गया और फिर एकमात्र शिक्षक को अन्यत्र प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। इसके बाद स्कूल को अनुपयोगी घोषित कर दिया गया।

स्थानीय लोगों का दावा है कि स्कूल में लगभग 27 बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन शिक्षक हटने के बाद शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।

विस्थापन और स्कूल शिफ्टिंग का विवाद

जालीपा क्षेत्र की आबादी विस्थापित होकर करणीनगर में बस रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पूरी आबादी नई जगह जा रही है, तो स्कूलों को भी वहीं शिफ्ट किया जाना चाहिए था।

लेकिन इसके बजाय स्कूलों को 3 किलोमीटर दूर अन्य संस्थानों में मर्ज कर दिया गया, जिससे करीब 50 परिवारों के बच्चों के सामने शिक्षा का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों का आरोप और मांग

ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वज मूलाराम ने शिक्षा के उद्देश्य से अपनी 3 बीघा कीमती जमीन स्कूल के लिए दान दी थी, ताकि गांव के बच्चे शिक्षित हो सकें। अब उसी जमीन और स्कूल व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

विस्थापित ग्रामीण जलाराम का कहना है कि स्कूल को करणीनगर में स्थानांतरित किया जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया।

बच्चों की पढ़ाई पर संकट

वर्तमान स्थिति में करणीनगर और डूडियों की ढाणी के आसपास रहने वाले परिवारों के बच्चों के लिए 3 किलोमीटर के दायरे में कोई सरकारी स्कूल उपलब्ध नहीं है। इससे छोटे बच्चों की शिक्षा बाधित हो रही है।

ग्रामीणों की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूल को नई आबादी के साथ करणीनगर में स्थानांतरित नहीं किया गया, तो विरोध प्रदर्शन और तेज किया जाएगा।

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