आदिवासी मीणा महापंचायत ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष SIT जांच और 'साजिश' के कोण की जांच की मांग

राजस्थान के आईजी किशन सहाय मीणा पर लगे दुष्कर्म के आरोपों के बाद आदिवासी मीणा महापंचायत ने इसे छवि धूमिल करने का षड्यंत्र बताया है। संगठन ने मुख्यमंत्री से एसआईटी (SIT) गठित कर पारदर्शी जांच की मांग की है।

May 6, 2026 - 20:29
आदिवासी मीणा महापंचायत ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष SIT जांच और 'साजिश' के कोण की जांच की मांग

जयपुर, 6 मई। राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और महानिरीक्षक (मानवाधिकार) श्री किशन सहाय मीणा के विरुद्ध हाल ही में दर्ज हुई प्राथमिकी (FIR) ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में 'आदिवासी मीणा पंच-पटेल महापंचायत' खुलकर अधिकारी के समर्थन में उतर आई है। महापंचायत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर इस पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई है।

शिकायत की प्रामाणिकता पर उठाए सवाल

महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा ने ज्ञापन में बताया कि श्री किशन सहाय मीणा के विरुद्ध एक 53 वर्षीय महिला द्वारा डाक के माध्यम से भेजी गई शिकायत के आधार पर विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज किया गया है। संगठन ने इस प्रक्रिया पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि जब शिकायत डाक से प्राप्त हुई है और पीड़िता ने अब तक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बयान दर्ज नहीं कराए हैं, तो इतनी जल्दबाजी में एफआईआर दर्ज करना और उन्हें एपीओ (APO) कर देना तर्कसंगत नहीं लगता।

साजिश और 'छवि-हनन' की आशंका

संगठन ने अंदेशा जताया है कि यह मामला एक संगठित षड्यंत्र हो सकता है। ज्ञापन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

सेवानिवृत्ति का समय: श्री मीणा जुलाई 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। संगठन का मानना है कि रिटायरमेंट से ठीक पहले उनकी सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के लिए यह साजिश रची गई हो सकती है।

त्वरित कार्रवाई पर प्रश्न: महापंचायत ने तुलना करते हुए कहा कि सामान्यतः वंचित वर्गों की महिलाओं के मामलों में एफआईआर दर्ज होने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिखाई गई 'अति-सक्रियता' संदेह पैदा करती है।

वैचारिक विरोध: श्री मीणा समाज में पाखंडमुक्त और मानवीय मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं। संगठन का दावा है कि उनके इस सामाजिक कार्य से नाराज रहने वाले तत्व इस शिकायत के पीछे हो सकते हैं।

संवैधानिक और कानूनी संदर्भ

ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के दो महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया गया है:

ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2014): इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया कि संवेदनशील प्रकरणों में प्राथमिकी से पूर्व 'प्रारंभिक जांच' (Preliminary Inquiry) की जानी चाहिए थी।

सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ: महापंचायत ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति की 'प्रतिष्ठा' भी उसके मौलिक अधिकारों का हिस्सा है, जिसकी रक्षा करना राज्य का कर्तव्य है।

महापंचायत की मुख्य मांगें

आदिवासी मीणा महापंचायत ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल SIT (विशेष जांच दल) का गठन हो।

शिकायत की भाषा और परिस्थितियों की जांच हो कि कहीं यह Personal Vendetta (व्यक्तिगत प्रतिशोध) तो नहीं है।

जांच पूरी होने तक 'मीडिया ट्रायल' रोकने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

यदि यह शिकायत झूठी या साजिश का हिस्सा पाई जाती है, तो षड्यंत्रकारियों पर कठोर कार्रवाई हो।

डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणा का कथन:

"हमारा उद्देश्य किसी महिला की शिकायत को नजरअंदाज करना नहीं है। यदि अपराध हुआ है तो सजा मिलनी चाहिए, लेकिन बिना प्रमाण के किसी का चरित्र हनन भी नहीं होना चाहिए। सत्य केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा।"

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