सम्राट कैबिनेट का शपथ ग्रहण, 32 मंत्रियों की एंट्री से क्या बदलेगा बिहार का सत्ता समीकरण?
पटना के गांधी मैदान में आज ऐसा राजनीतिक नजारा दिखा जिसने सबका ध्यान खींच लिया। सम्राट चौधरी सरकार के 32 मंत्रियों ने शपथ ली, लेकिन नए चेहरों और अचानक हुए फैसलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या बिहार की सियासत में कोई नया खेल शुरू हो चुका है?
बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा और ऐतिहासिक दिन देखने को मिला जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का कैबिनेट विस्तार पटना के गांधी मैदान में भव्य समारोह के साथ हुआ। इस मेगा इवेंट में कुल 32 मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें एनडीए के सभी घटक दलों को प्रतिनिधित्व दिया गया।
कार्यक्रम में बीजेपी से 15, जेडीयू से 13, जबकि एलजेपी (रामविलास) से 2, और HAM व RLM से 1-1 मंत्री शामिल हुए। मंच पर 50 से अधिक कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी, जहां देश और राज्य के शीर्ष नेता मौजूद रहे।
पीएम मोदी का भव्य स्वागत और रोड शो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना एयरपोर्ट से रोड शो करते हुए गांधी मैदान पहुंचे। पूरे रास्ते में फूलों की बारिश और "मोदी-मोदी" के नारों से माहौल गूंज उठा। समर्थकों ने जगह-जगह स्वागत किया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए उत्साह दिखाया गया।
मंच पर बड़े नेता मौजूद
गांधी मैदान के मंच पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद रहे। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सभी मंत्रियों को शपथ दिलाई।
नए चेहरों को मौका
कैबिनेट में कई नए चेहरों को शामिल किया गया है। जेडीयू से निशांत कुमार, बुलो मंडल और श्वेता गुप्ता जैसे नाम पहली बार मंत्री बने। बीजेपी से भी कई नए नेताओं को जगह मिली है, जिससे संगठन में नए नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत मिला है।
जातीय और राजनीतिक संतुलन
नई कैबिनेट में जातीय संतुलन पर भी खास ध्यान दिया गया है। EBC, OBC, दलित, सवर्ण और मुस्लिम प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का गठन किया गया है। महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर 5 महिलाओं को मंत्री पद मिला है।
सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां
पूरे पटना शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। NSG कमांडो, पुलिस बल और इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से कार्यक्रम की लाइव मॉनिटरिंग की गई। ट्रैफिक डायवर्जन के कारण कई जगह जाम की स्थिति भी देखने को मिली।
राजनीतिक माहौल गर्म
कार्यक्रम से पहले राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही। विपक्ष ने परिवारवाद और राजनीतिक नियुक्तियों पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे विकास और संगठनात्मक संतुलन का हिस्सा बताया।