चूरू सांसद राहुल कस्वां के ट्रैक्टर एकता मार्च को पुलिस ने रोका: 100 से अधिक ट्रैक्टर जब्त, 20 किसानों को हिरासत में लिया

चूरू से कांग्रेस सांसद राहुल कस्वां के नेतृत्व में जयपुर जा रहे किसानों के ट्रैक्टर एकता मार्च को पुलिस ने NH-52 पर रोक दिया। 100 से ज्यादा ट्रैक्टर जब्त किए गए और 15-20 किसानों को हिरासत में लिया गया। सांसद कस्वां धरने पर बैठ गए और कलेक्टर से बात की मांग की।

Nov 17, 2025 - 15:43
चूरू सांसद राहुल कस्वां के ट्रैक्टर एकता मार्च को पुलिस ने रोका: 100 से अधिक ट्रैक्टर जब्त, 20 किसानों को हिरासत में लिया

चूरू/सरसरौर, 17 नवंबर 2025: राजस्थान के चूरू से कांग्रेस सांसद राहुल कस्वां द्वारा आयोजित ट्रैक्टर एकता मार्च को पुलिस ने सोमवार को राष्ट्रीय राजमार्ग NH-52 पर रोक दिया। यह मार्च किसानों के विभिन्न मुद्दों, खासकर कृषि कानूनों के अवशेषों, फसल मूल्यों की मांग और किसान कर्जमाफी जैसे विषयों पर जयपुर तक पहुंचने के उद्देश्य से निकाला गया था। पुलिस कार्रवाई में 100 से अधिक ट्रैक्टर जब्त कर लिए गए, जबकि 15 से 20 किसानों को हिरासत में ले लिया गया। इस घटना के बाद सांसद कस्वां समर्थक किसानों के साथ धरने पर बैठ गए, जिससे इलाके में तनाव बढ़ गया।

मार्च का पृष्ठभूमि और उद्देश्य;  सांसद राहुल कस्वां, जो खुद एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं, ने इस ट्रैक्टर मार्च को किसान आंदोलन को नई जान फूंकने के लिए आयोजित किया था। उनका कहना था कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की मांगों को अनदेखा कर रही हैं। मार्च में शामिल होने वाले किसानों ने मंडी सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, बिजली बिल माफी और सिंचाई सुविधाओं पर जोर दिया। कस्वां ने सोशल मीडिया पर मार्च की घोषणा करते हुए कहा था, "किसान की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। हम जयपुर पहुंचकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखेंगे।"मार्च में चूरू जिले के विभिन्न गांवों से सैकड़ों किसान शामिल हुए। ट्रैक्टरों पर बैनर लगे थे, जिनमें लिखा था 'किसान एकता जिंदाबाद', 'एमएसपी की गारंटी दो' और 'कर्जमाफी लागू करो'। अनुमान के मुताबिक, 300 से अधिक ट्रैक्टर मार्च का हिस्सा थे, लेकिन पुलिस बैरिकेडिंग के कारण अधिकांश रास्ते में ही रुक गए।

घटना का कालक्रम;  सुबह 11:00 बजे: सांसद राहुल कस्वां ने चूरू जिले के रतनपुरा गांव से ट्रैक्टर मार्च को हरी झंडी दिखाई। मार्च जयपुर की ओर रवाना हुआ, जिसमें स्थानीय किसान संगठनों जैसे भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) और अन्य ग्रामीण संगठनों के सदस्य शामिल थे। मार्च शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ, लेकिन पुलिस को पहले से ही इसकी जानकारी थी। 

दोपहर 1:00 बजे के आसपास: राष्ट्रीय राजमार्ग NH-52 पर सरसरौर क्षेत्र में पहुंचते ही पुलिस ने मार्च को रोक लिया। जिला पुलिस, राजमार्ग पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीमें तैनात की गईं। NH-52 की चूरू जिला सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए और ट्रैक्टरों को आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान हल्की धक्कामुक्की हुई, लेकिन कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।

जब्ती और हिरासत: पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 100 से अधिक ट्रैक्टरों को जब्त कर लिया। ये ट्रैक्टर सरसरौर थाने के पास खड़े कर दिए गए। लगभग 15-20 किसानों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें सरसरौर थाने ले जाया गया। हिरासत में लिए गए किसानों में ज्यादातर स्थानीय युवा थे, जो मार्च के आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई धारा 144 के उल्लंघन और अवैध जमावड़े के तहत की गई।

धरना और बातचीत: मार्च रोके जाने के बाद सांसद राहुल कस्वां किसानों के साथ ही सड़क पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने जिला कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग की और कहा, "हमारी मांगें वैध हैं। सरकार बातचीत से डर क्यों रही है? जब तक कलेक्टर न आएं, हम यहीं रहेंगे।" कस्वां ने वीडियो जारी कर समर्थकों से एकजुट रहने का आह्वान किया।

दोपहर 2:00 बजे: जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा और एसपी जय यादव मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने सांसद कस्वां और किसान प्रतिनिधियों से करीब एक घंटे तक बात की। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि किसानों की मांगों को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा, लेकिन मार्च को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बातचीत के दौरान तनाव कम हुआ, लेकिन धरना जारी रहा।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया; पुलिस महकमे ने स्पष्ट किया कि मार्च के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए इसे रोका गया। एसपी जय यादव ने कहा, "हम शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान करते हैं, लेकिन यातायात बाधित करने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई जरूरी है। हिरासत में लिए गए किसानों को चेतावनी देकर रिहा कर दिया जाएगा।" जिला प्रशासन ने NH-52 पर यातायात बहाल करने के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात की। साथ ही, आसपास के गांवों में शांति बरतने की अपील की गई।

किसानों और सांसद की मांगें; सांसद कस्वां ने घटना के बाद कहा, "यह लोकतंत्र का अपमान है। किसान सड़क पर उतरने को मजबूर क्यों हो? सरकार को एमएसपी कानून बनाना चाहिए और कर्जमाफी पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।" किसान संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। मार्च में शामिल एक किसान नेता ने बताया, "हम जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री से मिलना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने रास्ता ही रोक दिया।"

बातचीत के बाद धरना समाप्त होने की संभावना है, लेकिन सांसद कस्वां ने कहा कि वे जल्द ही दिल्ली स्तर पर इस मुद्दे को उठाएंगे। हिरासत में लिए गए किसानों को शाम तक रिहा करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह घटना राजस्थान के किसान आंदोलन को फिर से सुर्खियों में ला रही है, जो 2020-21 के बड़े आंदोलन के बाद सुस्त पड़ गया था। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है, और विपक्षी दल इस पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।