होर्मुज पार कर भारत पहुंचा एक और LPG टैंकर: 20 हजार टन गैस लेकर आया, जंग के बाद अब तक 15 जहाज सुरक्षित निकले
ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित नहीं हुई है। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला LPG टैंकर ‘सिमी’ 20 हजार टन गैस लेकर गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में 15 से ज्यादा LPG जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत पहुंच चुके हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर लगातार बयानबाजी और युद्ध जैसे हालात के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। इन हालातों के बावजूद भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। एक और LPG टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर गुजरात के कांडला पोर्ट पहुंच गया है। इससे यह संकेत मिला है कि भारत की ऊर्जा सप्लाई फिलहाल सामान्य बनी हुई है और समुद्री व्यापार पूरी तरह बाधित नहीं हुआ है।
मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला LPG टैंकर ‘सिमी’ करीब 20 हजार टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत पहुंचा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज ने 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार किया था। यह वही समुद्री रास्ता है, जिसे दुनिया की सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जलधाराओं में गिना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी मार्ग से होती है। ऐसे में यहां पैदा होने वाला कोई भी तनाव सीधे वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतों पर असर डालता है।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात शुरू होने के बाद अब तक करीब 15 LPG जहाज भारत पहुंच चुके हैं। इससे साफ है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर लगातार सतर्क बना हुआ है और समुद्री आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
भारतीय एजेंसियों की बढ़ी निगरानी
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना समेत कई समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। अरब सागर और होर्मुज क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि भारतीय व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा सप्लाई पर किसी तरह का खतरा न आए।
इसी बीच ‘MV सनशाइन’ नाम का एक अन्य LPG जहाज भी हाल ही में सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान लगातार इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर नए बयान दे रहा है।
ईरान का नया शिपिंग सिस्टम
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के चेयरमैन इब्राहिम अजीजी ने कहा है कि ईरान जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही के लिए नया ट्रैफिक सिस्टम लागू करेगा। उनके मुताबिक, यह सिस्टम ईरान की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था के तहत सिर्फ वही जहाज और देश विशेष सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे, जो ईरान के साथ सहयोगात्मक रवैया रखेंगे। साथ ही इन सेवाओं के लिए शुल्क लेने की भी बात कही गई है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।
भारत ने क्या कहा?
भारत ने भी इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल शिपिंग रोकना या नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि ऊर्जा और उर्वरक संकट से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है।
भारत के इस बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की रुकावट भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकती है।
ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ती बयानबाजी
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत में भरोसा दिलाया कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा। हालांकि दूसरी तरफ ईरानी नेतृत्व लगातार सख्त बयान भी दे रहा है।
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा है कि अब दुश्मन देशों के सैन्य उपकरणों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं विदेश मंत्री अराघची ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका के साथ बातचीत विफल होती है तो ईरान युद्ध के लिए तैयार है।
उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष का असर अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई और वित्तीय दबाव बढ़ने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि “अमेरिकियों को ईरान के खिलाफ चुने गए युद्ध की कीमत चुकानी पड़ रही है।”
लेबनान और क्षेत्रीय हालात भी तनावपूर्ण
इजराइल और लेबनान के बीच संघर्षविराम को 45 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद दक्षिणी लेबनान में हमले जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई इलाकों में एयरस्ट्राइक और गोलाबारी हुई है, जिसके कारण हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा।
हिजबुल्लाह ने भी दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया। वहीं यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि लेबनान में जारी हिंसा और विस्थापन का असर करीब 7.7 लाख बच्चों की मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है।
दुनिया की नजर होर्मुज पर
दुनिया भर के देशों की नजर फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हुई है। चीन और रूस ने इस संकट का समाधान बातचीत और स्थायी सीजफायर से निकालने की बात कही है। वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर सिर्फ तेल और गैस की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, महंगाई और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा।
फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यही है कि ऊर्जा सप्लाई सामान्य बनी हुई है और LPG जहाज लगातार सुरक्षित रूप से देश पहुंच रहे हैं।
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