खेत के कुएं पर करोड़ों की एमडी ड्रग लैब का भंडाफोड़ NCB और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उजागर हुआ बड़ा नशा नेटवर्क.
सिरोही जिले के दांतराई गांव में पुलिस ने खेत के कुएं पर छिपी हाईटेक लैब का खुलासा किया, जहां एमडी ड्रग बनाने की तैयारी चल रही थी। पुलिस ने 35 जरीकन, 8 ड्रम केमिकल, मशीनें और लैब उपकरण जब्त किए। एनसीबी जोधपुर और गुजरात की सेंटर फॉर एक्सीलेंस टीम ने जांच में पुष्टि की कि ये सब एमडी ड्रग निर्माण में इस्तेमाल होते हैं। आरोपी भावेश उर्फ भूराराम इस नशा नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से करोड़ों की ड्रग फैक्ट्री शुरू होने से पहले ही ध्वस्त हो गई।
सिरोही जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया है। जिले के दांतराई क्षेत्र में कृषि कुएं के पास खेत में बनाई गई एक गुप्त लैब में एमडी (मादक पदार्थ) तैयार करने का काम चल रहा था। मुखबिर की सटीक सूचना पर सिरोही पुलिस ने दबिश देकर इस अवैध ड्रग फैक्ट्री को पकड़ लिया। यहां से करोड़ों रुपए की कीमत की केमिकल सामग्री, मशीनें और लैब उपकरण जब्त किए गए हैं।
खेत में छिपाई गई हाईटेक ड्रग लैब
पुलिस अधीक्षक प्यारेलाल शिवरान ने बताया कि दांतराई क्षेत्र में जोधाराम पुत्र कंवलाजी पुरोहित, निवासी आमपुरा रानीवाड़ा कल्ला (जालोर) के खेत में बने मकान में यह लैब संचालित हो रही थी। 4 नवंबर को जब पुलिस ने वहां छापा मारा, तो 35 जरीकन, 8 बड़े ड्रम केमिकल, कई प्लास्टिक के कंटेनर, पाउडर से भरे कट्टे, और हिटिंग मशीन, थर्मामीटर, राउंड बॉटम फ्लास्क, सेपरेटिक फनल, नोजल ट्यूब जैसे प्रयोगशाला उपकरण बरामद किए गए।
लैब पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से सुसज्जित थी ताकि एमडी ड्रग (मेथामफेटामाइन) का निर्माण किया जा सके। पुलिस का मानना है कि आरोपी इस लैब के जरिये राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र तक नशे की सप्लाई चेन फैलाने की तैयारी में थे।
एनसीबी और गुजरात की टीम ने की जांच
पुलिस की कार्रवाई के बाद 5 नवंबर को एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) जोधपुर की टीम मौके पर पहुंची। अगले दिन गुजरात गांधीनगर की सेंटर फॉर एक्सीलेंस टीम भी जांच के लिए आई। दोनों एजेंसियों ने सैंपल की जांच कर पुष्टि की कि जब्त केमिकल और उपकरण एमडी ड्रग निर्माण में ही उपयोग किए जाते हैं।
आरोपी भावेश उर्फ भूराराम मुख्य साजिशकर्ता
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि खेत का यह हिस्सा जोधाराम ने भावेश उर्फ भूराराम पुत्र डालूराम जाट (रानीवाड़ा निवासी) को ठेके पर दिया था। भावेश इस स्थान पर एमडी ड्रग निर्माण की तैयारी कर रहा था। पुलिस ने उसे नामजद आरोपी बनाया है और एनसीबी टीम इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बचा बड़ा हादसा
एसपी शिवरान ने बताया कि अगर पुलिस समय रहते कार्रवाई नहीं करती तो यह लैब एक बड़े नशा तस्करी नेटवर्क में बदल सकती थी। यह जोधपुर रेंज में चल रहे “नशा मुक्त अभियान” की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क
प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी भावेश का संपर्क राजस्थान, गुजरात और दिल्ली के कुछ ड्रग सिंडिकेट्स से था। एनसीबी टीम अब रासायनिक सप्लायर्स और पैसों के लेनदेन की भी जांच कर रही है।
कार्रवाई में शामिल अधिकारी
इस ऑपरेशन में आईजी राजेश मीना के निर्देशन में, एसपी प्यारेलाल शिवरान, एएसपी किशोर सिंह, और डीएसपी मनोज कुमार गुप्ता की टीम ने अहम भूमिका निभाई। थानाधिकारी सीताराम और उनकी टीम—गोविंदराम, भजनलाल, हरीसिंह, देशाराम, कांतिलाल, चूनाराम, विपुल कुमार, श्रवण कुमार, दिनेश कुमार, मोहनलाल, भजनलाल व चालक सागरमल—ने दबिश में सक्रिय भागीदारी की।