US‑Israel‑Iran War: ट्रंप को किसने उकसाया, क्या बताया और क्यों कहा गया ‘ईज़ी ऑपरेशन’ — पूर्व अधिकारी ने खोले डार्क सीक्रेट
डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व अधिकारी जो केंट ने कहा कि इजरायल ने ईरान पर हमला करने का आसान ऑपरेशन बताया, जबकि ट्रंप को कोई वैकल्पिक राय नहीं सुनाई गई।
नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में अमेरिकी राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी केंद्र के पूर्व निदेशक जो केंट ने एक बड़ा खुलासा किया है। उनके मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में ट्रंप को इजरायल ने गलत भरोसा दिया कि यह ऑपरेशन आसान होगा।
वेनेजुएला की घटना का उदाहरण
जो केंट ने बताया कि ट्रंप को यह विश्वास दिलाया गया कि वेनेजुएला में निकोलस मादुरो के खिलाफ अभियान की सफलता के बाद अमेरिकी सेना आसानी से ईरान में भी शासन बदल सकती है। उन्होंने कहा, “जून के बाद ट्रंप के चारों ओर बहुत छोटा सर्कल बन गया, और उन्हें कोई विकल्प सुनने को नहीं मिला। वेनेजुएला की सफलता के कारण राष्ट्रपति को यह लगा कि ईरान में भी वही आसान ऑपरेशन संभव है।”
इजरायल का प्रस्ताव
जनवरी में ईरान में बढ़ती महंगाई और आर्थिक कुप्रबंधन के विरोध में प्रदर्शन शुरू होने के बाद इजरायल ने ट्रंप को बमबारी करने और प्रदर्शनकारियों के कुछ विरोधियों को खत्म करने का सुझाव दिया। केंट के अनुसार, इजरायल ने बताया कि “यह ऑपरेशन इराक जैसा होगा—हम IRGC पर बमबारी करेंगे और प्रदर्शनकारी सत्ता संभाल लेंगे।”
ट्रंप का दृष्टिकोण
पूर्व अधिकारी के अनुसार, ट्रंप इस ऑपरेशन को लेकर संशय में थे, लेकिन उनके चारों ओर बनाए गए छोटे सर्कल और “ट्रूमैन शो जैसी” परिस्थिति ने उन्हें आसानी से राजी कर लिया।
ट्रंप और नेतन्याहू का इनकार
हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन दावों का खंडन किया है और कहा कि तेल अवीव ने उन्हें ईरान के खिलाफ युद्ध में जाने के लिए मजबूर नहीं किया।
इस बयान का महत्व
- यह खुलासा अमेरिका और इजरायल के रणनीतिक निर्णयों पर सवाल उठाता है
- ट्रंप प्रशासन के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और सलाह पर शक पैदा करता है
- वैश्विक राजनीति और मध्यपूर्व नीति पर प्रभाव डाल सकता है