भीषण गर्मी ने ली 47 वर्षीय युवक की जान, राजस्थान के 9 शहर लू की चपेट में
सीकर में 47 वर्षीय नेमाराम का शव सड़क किनारे मिला, परिजनों ने अत्यधिक गर्मी और प्यास को मौत का कारण बताया। राजस्थान के 9 शहर, जिनमें जयपुर, चूरू, बीकानेर शामिल हैं, 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के साथ लू की चपेट में हैं। 22 मई तक गर्मी से राहत नहीं मिलने की संभावना है।

सीकर, 20 मई 2025: राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी ने एक और जान ले ली। सीकर के धोद थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह 8 बजे सिंगरावट से डीडवाना जाने वाली सड़क किनारे 47 वर्षीय नेमाराम का शव मिला। परिजनों ने दावा किया कि अत्यधिक गर्मी और प्यास के कारण उनकी मौत हुई। धोद थाना अधिकारी राकेश कुमार मीणा ने बताया कि मृतक की पहचान पूर्णपुरा निवासी नेमाराम के रूप में हुई है। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।
राजस्थान में गर्मी का कहर, 9 शहर लू की चपेट में
राजस्थान इस समय भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। जयपुर सहित 9 शहरों—पिलानी (झुंझुनूं), चूरू, बीकानेर, श्रीगंगानगर, टोंक, बाड़मेर, दौसा और जैसलमेर—में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। मौसम विभाग ने 22 मई तक गर्मी से राहत की कोई संभावना नहीं जताई है। बीकानेर संभाग में स्थिति और गंभीर है, जहां चूरू, झुंझुनूं, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के लिए मंगलवार को गर्मी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
उदयपुर, कोटा में आंधी-बारिश की संभावना
हालांकि, उदयपुर और कोटा संभाग में अगले तीन दिनों तक आंधी और बारिश की संभावना है, जिससे इन क्षेत्रों में गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। मौसम विभाग ने इन संभागों में हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाओं की भविष्यवाणी की है।
गर्मी से बचाव के लिए उपाय
गर्मी के इस प्रकोप से बचने के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं। जयपुर, अलवर सहित कई शहरों में सड़कों पर मशीनों से पानी का छिड़काव किया जा रहा है ताकि तापमान को नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा, लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने, पर्याप्त पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी जा रही है।
चुनौतियां और भविष्य
राजस्थान में गर्मी हर साल एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की तीव्रता और अवधि बढ़ रही है। ऐसे में स्थायी समाधानों जैसे वृक्षारोपण, जल संरक्षण और शहरी नियोजन पर ध्यान देना जरूरी है।