RPSC में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति: पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की ओर मजबूत कदम

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में तीन नए सदस्यों - सेवानिवृत्त आईपीएस हेमंत प्रियदर्शी, कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अशोक कलवार, और प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार बिस्सू की नियुक्ति हुई है। यह नियुक्ति आयोग में पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सात सदस्यों के साथ अब तीन पद रिक्त हैं।

Sep 24, 2025 - 13:38
RPSC में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति: पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की ओर मजबूत कदम

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की गई है। राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त आईपीएस हेमंत प्रियदर्शी, कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार कलवार और प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार बिस्सू को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। इस नियुक्ति के साथ ही RPSC में सदस्यों की संख्या 7 हो गई है, जबकि तीन पद अभी भी रिक्त हैं। हाल ही में सरकार ने RPSC में सदस्यों की संख्या 7 से बढ़ाकर 10 कर दी थी, जिसके बाद यह नियुक्तियां की गई हैं।

यह दूसरी बार है जब वर्तमान सरकार ने RPSC में नियुक्तियां की हैं। इससे पहले पूर्व डीजीपी यू.आर. साहू को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। नए सदस्यों की नियुक्ति से आयोग की कार्यक्षमता और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

हेमंत प्रियदर्शी: भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए चर्चित

सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हेमंत प्रियदर्शी 1992 बैच के अधिकारी हैं, जिन्होंने मई 2025 में डीजी रैंक से सेवानिवृत्ति ली। मूल रूप से झारखंड के रहने वाले प्रियदर्शी ने एमटेक (मैकेनिकल) और डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज में एम.फिल की डिग्री हासिल की है। पुलिस सेवा में रहते हुए उन्होंने डीजी (SCRB), साइबर क्राइम, एसीबी के एडीजी, आईजी, और एसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

प्रियदर्शी विशेष रूप से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में कार्यवाहक महानिदेशक के रूप में अपनी सख्त कार्रवाइयों के लिए चर्चा में रहे। इस दौरान भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ उनकी त्वरित और प्रभावी कार्रवाइयों ने सुर्खियां बटोरीं। हालांकि, उनकी अधिकांश सेवा प्रशासनिक और तकनीकी भूमिकाओं में रही, और वे केवल दो साल ही फील्ड ड्यूटी पर रहे। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत उन्होंने ITBP और CRPF में भी अपनी सेवाएं दीं।

डॉ. अशोक कुमार कलवार: कैंसर विशेषज्ञ से RPSC सदस्य

जोधपुर के प्रख्यात कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार कलवार को RPSC में नई जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. कलवार ने जोधपुर, अजमेर, और बीकानेर जैसे प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में अपनी सेवाएं दी हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे डॉ. कलवार के 30 से अधिक शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में और 70 से अधिक राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुके हैं।

दैनिक भास्कर से बातचीत में डॉ. कलवार ने कहा, "राज्य सरकार ने मुझ पर बड़ा विश्वास जताया है। यह एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है। मैं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत रहा हूं और कई परीक्षाओं का आयोजन कर चुका हूं। इस अनुभव का लाभ उठाकर मैं RPSC में पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करूंगा।" उन्होंने पेपर लीक जैसे मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता पेपर की गोपनीयता, गुणवत्ता, और परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा होगी।

डॉ. सुशील कुमार बिस्सू: शैक्षणिक अनुभव का खजाना

हनुमानगढ़ जिले के गोदेंका गांव के निवासी डॉ. सुशील कुमार बिस्सू ने गणित में एमएससी और पीएचडी की डिग्री हासिल की है। वर्तमान में अजमेर में रहने वाले डॉ. बिस्सू ने 33 वर्षों तक मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालयों में शिक्षण कार्य किया है। उनके 35 शोध पत्र विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। वे कई विश्वविद्यालयों की एकेडमिक कमेटी और बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षणिक महासंघ (ABRMS) से भी जुड़े रहे हैं, जो RSS की विचारधारा से प्रेरित संगठन है।

RPSC में सुधार की उम्मीद

हाल के वर्षों में RPSC की प्रतिष्ठा को पेपर लीक जैसे मामलों ने प्रभावित किया है। इस संदर्भ में हाईकोर्ट ने भी आयोग के सदस्यों की भूमिका पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद डॉ. मंजू शर्मा ने सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था। नए सदस्यों की नियुक्ति के बाद अब आयोग में सात सदस्य कार्यरत हैं, जिसमें दो पूर्व आईपीएस अधिकारी शामिल हैं।

डॉ. कलवार और डॉ. बिस्सू ने युवाओं को भरोसा दिलाया है कि वे निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे। विशेष रूप से, डॉ. कलवार ने कहा, "पिछले कुछ समय से RPSC की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। हमारा प्रयास होगा कि युवाओं का विश्वास फिर से स्थापित हो और भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।"

तीन पद अभी भी रिक्त

RPSC में 10 सदस्यों की स्वीकृत संख्या के बावजूद तीन पद अभी भी खाली हैं। सरकार ने हाल ही में सदस्यों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया था, जिसके बाद छह रिक्त पदों में से तीन पर नियुक्तियां की गई हैं। उम्मीद है कि शेष रिक्तियों को भी जल्द भरा जाएगा, ताकि आयोग अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके।

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