राजस्थान में स्लीपर बसों का संचालन ठप: सड़क हादसों के खिलाफ सख्ती से लाखों यात्री प्रभावित, 8000 बसें रात 12 बजे के बाद बंद
राजस्थान में लगातार सड़क हादसों के बाद निजी स्लीपर बस ऑपरेटरों ने रात 12 बजे से 8000 बसें बंद कर दीं, जिससे लाखों यात्री प्रभावित; सरकार की सख्ती और सुरक्षा उल्लंघन के खिलाफ हड़ताल शुरू।
जयपुर, 31 अक्टूबर 2025:
राजस्थान की सड़कों पर लगातार हो रहे भयावह हादसों ने राज्य सरकार को कठोर कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। हाल के दिनों में स्लीपर बसों से जुड़े कई घातक दुर्घटनाओं के बाद परिवहन विभाग ने सख्ती बरतते हुए निजी स्लीपर बस ऑपरेटरों पर कार्रवाई तेज कर दी। इसके जवाब में ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ऑनर एसोसिएशन ने गुरुवार रात 12 बजे के बाद पूरे राज्य में लगभग 8000 स्लीपर बसों का संचालन अचानक बंद करने का ऐलान कर दिया। इस फैसले से रोजाना 3 लाख से अधिक यात्रियों का सफर बुरी तरह प्रभावित हो गया है। टिकट बुकिंग रद्द हो गईं, स्टैंड पर यात्रियों की भगदड़ मच गई और वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश में लोग परेशान हैं।
हादसों का काला सिलसिला: स्लीपर बसें बन रहीं 'मौत की सवारी' राजस्थान में अक्टूबर 2025 सड़क सुरक्षा के लिए काला अध्याय साबित हो चुका है। पिछले 14 दिनों में ही पांच बड़े बस हादसों में 72 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें अधिकांश स्लीपर बसों से जुड़े मामले हैं।
इन हादसों की जड़ में स्लीपर बसों की खराब डिजाइन, ओवरलोडिंग, इमरजेंसी एग्जिट की कमी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी है। स्लीपर बसों की संकरी गलरियां और ऊपरी बर्थों की ऊंचाई हादसे के समय यात्रियों को भागने का मौका ही नहीं देतीं। चीन जैसे कई देशों में तो स्लीपर बसें पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।सबसे भयानक हादसा 14 अक्टूबर को जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर थईयात गांव के पास हुआ, जहां एक एसी स्लीपर बस अचानक आग का गोला बन गई। बस में सवार 57 यात्रियों में से 26 की जलकर मौत हो गई, जबकि 9 घायल हुए। घटना दोपहर 3:30 बजे की थी, जब बस वार म्यूजियम के पास पहुंची। चालक ने पीछे से उठते धुएं को नजरअंदाज कर दिया, और कुछ ही सेकंडों में पूरी बस लपटों में घिर गई। आग इतनी तेज थी कि यात्रियों को बाहर निकलने का समय तक न मिला। सेना को जेसीबी से बस का गेट तोड़ना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस हादसे पर शोक व्यक्त किया, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुआवजे का ऐलान किया। इसके बाद 19 अक्टूबर को धौलपुर में एक स्लीपर बस और टेंपो की टक्कर में 12 लोगों की मौत हो गई।
24 अक्टूबर को जयपुर के मनोहरपुर में एक स्लीपर बस हाईटेंशन तारों से टकराकर आग लगने से 3 मजदूरों की जलकर मौत हो गई, जबकि 10 घायल हुए। इस बस में 50 से अधिक मजदूर सवार थे, और जांच में पता चला कि बस का परमिट समाप्त हो चुका था तथा ओवरलोडिंग की 40 बार चालान कट चुकी थी। जोधपुर और जैसलमेर जैसे जिलों में तो स्लीपर बसें 'चलता-फिरता ताबूत' बन चुकी हैं, जहां रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच 60% हादसे होते है।
सुरक्षा लापरवाही: मॉडिफिकेशन और ओवरलोडिंग की खतरनाक सच्चाई हादसों की जांच में सामने आया कि अधिकांश स्लीपर बसें मॉडिफाई की जाती हैं। इमरजेंसी गेट पर सीटें लगा दी जाती हैं, अग्निशामक यंत्र गायब रहते हैं, और छत पर बाइकें, फर्नीचर व सिलेंडर लादकर लॉजिस्टिक्स वाहन बना दिया जाता है। जयपुर के सिंधी कैंप और नारायण सिंह सर्किल पर पत्रिका की जांच में पाया गया कि बसों की ऊंचाई 4 फीट तक बढ़ा दी जाती है, जिससे संतुलन बिगड़ जाता है। एक बस में यूपी से राजस्थान तक कोई चेकिंग नहीं हुई, भले ही 9 आरटीओ इलाकों से गुजरी हो।
एनडीटीवी को मिले एक वीडियो में दिखा कि एक स्लीपर बस क्षमता से ज्यादा यात्रियों से भरी थी, जहां सीटों के अलावा दर्जनों लोग खड़े थे। विशेषज्ञों के अनुसार, स्लीपर बसों में 60% लंबाई तक सुरक्षा रेलिंग जरूरी है, लेकिन अधिकांश में यह अनुपस्थित है। भांकरोटा हादसे (10 महीने पहले) के बाद भी सबक नहीं लिया गया।
बस ऑपरेटरों का विरोध: हड़ताल से यात्रियों पर संकट 29 अक्टूबर को परिवहन विभाग के सख्त आदेश के बाद चेकिंग अभियान तेज हो गया। बसों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है और सीज की जा रही हैं। इससे आक्रोशित एसोसिएशन ने 31 अक्टूबर रात 12 बजे से स्ट्राइक शुरू कर दी। एसोसिएशन का कहना है कि नियमों का पालन न होने पर सुधार के लिए समय दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि 2 नवंबर से 20 हजार अन्य प्राइवेट बसें भी बंद कर दी जाएंगी।
इस हड़ताल से जयपुर, जोधपुर, उदयपुर जैसे शहरों से दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, इंदौर जाने वाले रूट प्रभावित हैं। टिकट बुकिंग ऐप्स पर रिफंड की होड़ मच गई, और स्टैंड पर यात्री ट्रेन या अन्य वाहनों की तलाश में भटक रहे हैं। एक यात्री ने बताया, "दिवाली के ठीक पहले यह क्या हो गया? परिवार के साथ सफर करना था, एसोसिएशन ने सरकार से बातचीत की मांग की है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।